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सचमुच “बीमारू राज्य” है बिहार और उत्तर प्रदेश, जानिए कैसे

नई दिल्ली। आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में बदहाली के चलते बिहार और उत्तर प्रदेश को अक्सर “बीमारू राज्य” कहा जाता है पर अब नीति आयोग की एक रिपोर्ट ने इन दोनों राज्यों के असल में “बीमारू राज्य” होने पर मुहर लगा दी है।  

दरअसल, देश के तमाम राज्य स्वास्थ्य के पैमाने पर कहां खड़े हैं, इसे लेकर नीति आयोग ने स्टेट हेल्थ रैंकिंग जारी की है। इस रैंकिंग के जरिये आयोग ने यह पता लगाया है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य की क्या स्थिति है। इसमें हर बार की तरह ही एक बार फिर केरल ने बाजी मारी है और वह देश में सबसे स्वस्थ राज्य है जबकि बिहार और उत्तर प्रदेश निचले पयदान पर हैं।  इससे पहले नीति आयोग ने फरवरी 2018 में पहली बार रैंकिंग जारी की थी। तब भी केरल पहले पायदान पर रहा था। नीति आयोग स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर 23 अलग-अलग पैमानों पर राज्यों का आकलन करता है जिसके आधार पर स्टेट हेल्थ रैंकिंग जारी की जाती है। 

छोटे राज्यों में मिजोरम सबसे आगे

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने मंगलवार को बताया कि छोटे राज्यों ने स्वास्थ्य के मामले में रैंकिंग सुधारी है। बड़े राज्यों में हरियाणा, राजस्थान और झारखंड ने पिछली बार की तुलना में अपनी रैंकिंग में सुधार किया है जबकि छोटे राज्यों में मिजोरम सबसे आगे रहा। त्रिपुरा और मणिपुर ने भी रैंकिंग में सुधार किया है। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और ओडिशा वे राज्य हैं जो बेहद खराब परफॉर्म कर रहे हैं।

नीति आयोग का कहना है कि स्वास्थ्य सिर्फ आमदनी या औसत प्रति व्यक्ति आय पर निर्भर नहीं है। अगर देश में या राज्यों में स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाना है तो पब्लिक स्पेंडिंग को बढ़ाना पड़ेगा। अभी स्थिति ये है कि अधिकतर पैसा प्राइवेट सेक्टर से खर्च होता है। इसके अलावा आयुष्मान भारत की पहल को टियर-2 और टियर-3 सेक्टर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। राजीव कुमार ने कहा कि कई राज्यों में सुधार की जरूरत है। इसके लिए नीति आयोग राज्यों के साथ बैठकर काम करेगा।

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