The Voice of Bareilly since 2010

हाईकोर्ट ने कहा- आरोपपत्र दाखिल होने के बाद भी दी जा सकती है अग्रिम जमानत

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में अग्रिम जमानत को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। बुधवार को दिए गए इस फैसले में न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने कहा है कि आरोपपत्र दाखिल होने और उस पर मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने के बाद भी ट्रायल खत्म होने तक अग्रिम जमानत दी जा सकती है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के सुशीला अग्रवाल केस के फैसले का हवाला देते हुए याची को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है। साथ ही उसे ट्रायल तक भारत न छोड़ने, पासपोर्ट अदालत में जमा करने, गवाहों को धमकी या प्रलोभन न देने, विचारण में सहयोग करने जैसी शर्तें लगाई हैं।

हाईकोर्ट ने यह आदेश अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विधि छात्र आदिल की अग्रिम जमानत अर्जी पर दिया है। याची पर सह अभियुक्त को शिकायतकर्ता पर गोली चलाने के लिए उकसाने का आरोप है। अदालत ने कहा कि याची का आपराधिक इतिहास नहीं है और वह संभ्रांत घर का है। पिता उसी विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर हैं। विवेचना के दौरान उसे अग्रिम जमानत मिली थी। दूसरी ओर सरकार की तरफ से कहा गया कि आरोपपत्र दाखिल हो चुका है। अदालत ने समन जारी कर दिया है। याची को नियमित जमानत अर्जी दाखिल करनी चाहिए, अग्रिम जमानत अर्जी पोषणीय नहीं है।

हाईकोर्ट ने न्यायिक निर्णयों पर विचार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ट्रायल खत्म होने तक अग्रिम जमानत दी जा सकती है।

error: Content is protected !!