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सदियों का इंतजार खत्म, नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में किया राम मंदिर भूमि पूजन

अयोध्या।  (Bhumi Pujan of Ram Mandir) राम मंदिर के निर्माण का स्वप्न साकार होना शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री ने आज बुधवार, 5 अगस्त 2020 को वैदिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर मंदिर का भूमि पूजन किया। प्रधानमंत्री ने रामनगरी के अपने ऐतिहासिक दौरे की शुरुआत हनुमानगढ़ी में भगवान श्रीराम के द्वारपाल और सबसे बड़े भक्त महावीर हनुमान कर पूजन कर की। इसके बाद राम जन्मभूमि पर विराजमान रामलला के दर्शन किए और आरती उतारी। प्रधानमंत्री मोदी भारतीय पारंपरिक पोशाक हल्के पीले रंग का कुर्ता, सफेद धोती और भगवा रंग के गमझे में थे। काशी के तीन प्रकांड विद्धानों ने भूमि पूजन का अनुष्ठान शुरू किया। प्रधानमंत्री को यजमान के तौर पर संकल्प दिलाया गया और गणेश पूजन के साथ भूमि पूजन का कार्यक्रम शुरू हो गया। 

इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत आदि मौजूद थे। पुरोहितों ने प्रधानमंत्री मोदी से विधिवत पूजा-अर्चना कराई। चांदी की नौ शिलाओं का पूजन किया गया। करीब 12 बजे शुरू हुआ भूमि पूजन कार्यक्रम करीब 48 मिनट चला। अभिजीत मुहुर्त में भूमि पूजन और शिला पूजन सम्पन्न होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने साक्षात दंडवत कर देश की तरक्की और कोरोना वायरस के नाश का वरदान प्रभु श्रीराम से मांगा। आधारशिला रखने के बाद भूमि पूजन के दौरान निकली मिट्टी को अपने माथे पर भी लगाया।

भूमि पूजन कार्यक्रम के बाद हर-हर महादेव, जय श्रीराम और भारत माता की जय के नारे लगाए गए। 

कोरोना वायरस संक्रमण की गाइडलाइन का पूरा पालन

तय समय के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हेलीकाप्टर साकेत डिग्री कालेज में बने अस्थायी हेलीपेड पर उतरा जहां पहले से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनकी आगवानी के लिए मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने कोरोना संक्रमण के लिये तय गाइडलाइन का पूरा पालन किया। वह मास्क लगाए हुए थे । उनका स्वागत करने वाले दो मीटर की दूरी पर बनाये गए सफेद रंग के गोलों में खड़े थे। यहां से प्रधानमंत्री मोदी का काफिला हनुमानगढ़ी के लिए रवाना हो गए। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सड़क पर सन्नाटा था लेकिन छतों पर खड़े लोग हाथ हिलाकर प्रधानमंत्री का स्वागत कर रहे थे। 

नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री है जिन्होंने श्रीराम जन्मभूमि परिसर में विराजमान रामलला के दर्शन किए। वह इससे पहले वर्ष 1991 में यहां आये थे जब उनसे एक पत्रकार ने संयोग से दोबारा आने का समय पूछा था। उस समय उन्होंने मुस्करा कर कहा था कि अब अयोध्या तभी आऊंगा जब राम मंदिर का निर्माण शुरू होगा।

हनुमान गढ़ी में 10 मिनट बिताने के बाद प्रधानमंत्री करीब 12 बजे राम जन्मभूमि परिसर पहुंचे। 

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