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अवमानना मामलाः सीबीआइ के पूर्व अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव को मिली यह सजा

सुप्रीम कोर्ट ने नागेश्वर राव को सजा के तौर पर दिनभर अदालत में खड़े रहने का आदेश दिया। उन पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।

नई दिल्ली। मुजफ्फरपुर संरक्षण गृह प्रकरण से जुड़े अवमानना मामले में सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव बुरे फंसे। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले के सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उन्हें अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया। कोर्ट ने एम. नागेश्वर राव को सजा के तौर पर दिनभर अदालत में खड़े रहने का आदेश दिया। उन पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।इससे पहले  एम. नागेश्वर राव इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। देश की शीर्ष आदालत ने उन्हें निजी तौर पर पेश होने का आदेश दिया था

सीबीआइ के अतिरिक्त निदेशक एवं पूर्व अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी। राव ने कहा है कि उन्हें अपनी गलती का अहसास है और उनकी मंशा कोर्ट की अवहेलना करने की कतई नहीं थी।

वह इसके बारे में सोच भी नहीं सकते। वह कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगते हैं। उन्हें माफ कर दिया जाए। राव के अलावा दूसरे अधिकारी एस. भासुरन ने भी बिना शर्त माफी मांगी। दोनों ही अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालय की अवमानना में 12 फरवरी को तलब किया था। सीबीआई की तरफ से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलील रखी कि नागेश्वर राव ने माफी मांगी है और उन्होंने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं की है।

सुप्रीम कोर्ट ने गत सात फरवरी को रोक के आदेश के बावजूद मुजफ्फरपुर संरक्षण गृह मामले की जांच कर रहे अधिकारी एके शर्मा का सीबीआइ के बाहर तबादला करने पर एम. नागेश्वर राव और एस. भासुरन को प्रथम दृष्टया अवमानना का जिम्मेदार माना था। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ के निदेशक से उन सभी बाकी अधिकारियों के भी नाम पूछे जो एके शर्मा की तबादला प्रक्रिया में शामिल थे।  

राव ने आइपीएस अधिकारी के तौर पर अपने बेदाग सर्विस रिकार्ड का हवाला देते हुए कहा है कि उन्होंने जानबूझकर कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं की है। वह ऐसा करने की सपने में भी नहीं सोच सकते। राव ने कहा है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के गत वर्ष 31 अक्टूबर और 28 नवंबर के आदेश को देखते हुए एके शर्मा को प्रोन्नत करने के लिए सीबीआइ से रिलीव करने की कानूनी राय कोर्ट से अनुमति लिए बगैर नहीं स्वीकार करनी चाहिए थी। राव ने कहा- मैं अपनी गलती स्वीकार करता हूं और कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगता हूं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष मुजफ्फरपुर संरक्षण गृह यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे अधिकारी एके शर्मा का तबादला न किए जाने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद इसी वर्ष जनवरी में जब नागेश्वर राव सीबीआइ के अंतरिम निदेशक थे, एके शर्मा का तबादला सीबीआइ से सीआरपीएफ के अतिरिक्त डीजी पद पर कर दिया गया।

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