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जम्मू-कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट पर भारत ने इस तरह जताया एतराज

नई दिल्ली। भारत ने जम्मू-कश्मीर पर जारी की गई रिपोर्ट को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (United Nation Rights Body Office) से सोमवार को कड़ा  एतराज जताया और कहा कि यह झूठ और राजनीति से प्रेरित विमर्श की निरंतरता भर है और पाकिस्तान से होने वाले सीमापार आतंकवाद के मूल मुद्दे की अनदेखी करता है। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त (OHCHR)  ने पिछले साल कश्मीर पर अपनी पहली रिपोर्ट जारी की थी और सोमवार को उसी रिपोर्ट की अगली कड़ी में उसने दावा किया कि न तो भारत ने और न ही पाकिस्तान ने उठायी गई विभिन्न चिंताओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता रवीश कुमार ने इस रिपोर्ट पर प्रहार करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के मानवधिकारों के बारे में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट झूठे और प्रेरित कथन पर आधारित है। रवीश कुमार ने रिपोर्ट को बकवास करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान से सीमा पार आतंकी हमलों के वर्षों के दौरान बनाई गई स्थिति का विश्लेषण इसकी कार्यकुशलता के संदर्भ के बिना किया गया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और राज्य प्रायोजित आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के बीच संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त की रिपोर्ट के अपडेट को कृत्रिम समानता बनाने के लिए किया गया प्रयास लगता है।

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के उच्चायुक्त कार्यालय की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि “’मई 2018 से अप्रैल 2019 तक कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नागरिक हताहतों की संख्या एक दशक में सबसे अधिक हो सकती है। न तो भारत और न ही पाकिस्तान ने चिंताओं को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्‍मीर (पीओके) में भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा किए गए मानवाधिकारों के उल्लंघन की जवाबदेही लगभग न के बराबर है।”

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