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20,000 करोड़ रुपये के टैक्स विवाद में भारत की हार, वोडाफोन ने अंतरराष्ट्रीय पंचाट में जीता मुकदमा

नई दिल्ली। टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर वोडाफोन ग्रुप पीएलसी ने 2 अरब डॉलर के कर विवाद मामले में भारत सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण  (International arbitration tribunal) में मुकदमा जीत लिया है। मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने यह जानकारी दी। एक सूत्र ने बताया कि हेग में स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पंचाट ने कहा कि भारत सरकार का वोडाफोन पर कर देनदारी से साथ-साथ ब्याज और पेनाल्टी लगाना भारत और नीदरलैंड्स के बीच इनवेस्टमेंट ट्रीटी एग्रीमेंट का उल्लंघन है।

ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि भारत सरकार को वोडाफोन से बकाया मांगना बंद करना चाहिए और कानूनी लड़ाई लड़ने पर हुए खर्च के आंशिक मुआवजे के तौर पर कंपनी को 43 लाख पौंड का भुगतान करना चाहिए।

54.7 लाख डॉलर का भुगतान करना चाहिए। इस बारे में वोडाफोन और भारत के वित्त मंत्रालय ने तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई।

वोडाफोन और वित्त मंत्रालय से इस बारे में टिप्पणी के लिए आग्रह किया है लेकिन उनकी ओर से तत्काल कोई जवाब नहीं मिला है।

यह विवाद Hutchison Whampoa की भारतीय मोबाइल परिसंपत्तियों के 2007 में वोडाफोन द्वारा अधिग्रहण के समय से चला आ रहा है। सरकार का कहना है कि वोडाफोन पर अधिग्रहण के लिए कर देनदारी बनती है, जिसे कंपनी ने चुनौती दी थी। 

वर्ष 2012 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया था लेकिन सरकार ने उसी साल नियमों में बदलाव किया जिससे सरकार को पहले पूरी चुकी डील पर भी टैक्स लेने की शक्ति हासिल हो गई

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