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नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में #IndiaSupportsCAA अभियान

नई दिल्‍ली। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस कानून को लेकर देशभर में मचे घमासान के बीच भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया है, कई केंद्रीय मंत्री भी सीएए को लेकर जागरूकता देशभर में फैलाने के लिए निकले हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर #IndiaSupportsCAA अभियान शुरू किया है। उन्होंने लोगों से इस अभियान का समर्थन करने की अपील की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने #IndiaSupportsCAA ट्वीट करते हुए लिखा- क्योंकि सीएए प्रताड़ित शरणार्थियों को नागरिकता देता है और यह किसी की नागरिकता छीनता नहीं है। नमो ऐप के वॉलिंटियर मॉड्यूल के वाइस सेक्शन में मजेदार कंटेंट, ग्रॉफिक्स और अन्य को देखने के लिए इस हैशटैग को देखें। पीएम ने अपने ट्वीट में लिखा है कि इस हैशटैग के जरिए सीएए के पक्ष में अपना समर्थन दें।

सीएए का कांग्रेस, बसपा, सपा, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी और राजद समेत लगभग सभी विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं। असम, दिल्ली, यूपी, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक के अलावा कई राज्‍यों में इस कानून के विरोध में जोरदार प्रदर्शन हुए। उत्‍तर प्रदेश में तो इन प्रदर्शनों में 19 लोग मारे गए। दिल्ली में भी हिंसक प्रदर्शन हुए। विपक्षी दल सरकार से इस एक्ट को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, भाजपा इस कानून को लेकर झुकने को कतई तैयार नहीं है। केंद्रीय मंत्रियों की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि यह कानून किसी भारतीय की नागरिकता नहीं छीनेगा, बल्कि पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान में रह रहे अल्‍पसंख्‍यकों को नागरिकता देगा।

नागरिकता संशोधन कानून और नेशनल पोपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) को एनआरआइसी (नेशनल रजिस्टर आफ इंडियन सिटिजन) से जोड़कर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन में जुटी कांग्रेस कठघरे में आ गई है। दरअसल, सत्ता में रहते हुए वह खुद भी एनआरसी की बात करती रही है। संप्रग दो कार्यकाल के काल में गृह मंत्रालय ने साफ कहा था कि वह एनआरसी लाने का इरादा रखता है और नागरिकता उसी के आधार पर तय होगा। संसद में एक सवाल के जवाब में तत्कालीन गृह राज्यमंत्री ने कहा था कि एनपीआर में सभी दस उंगलियों के निशान, आइरिस, फोटोग्राफ आदि के पहचान लिए जाएंगे और फिर कार्ड दिए जाएंगे लेकिन वह नागरिकता का सबूत नहीं होगा। नागरिकता अधिकार उसी को मिलेगा जिसका नाम एनआरसी में होगा। यह एनआरपी के सबसेट के रूप में बाद में आएगा।

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