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वन्दे मातरम् का मूल (पूर्ण) रूप

वन्दे मातरम् का मूल (पूर्ण) रूप बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित है, जो उनके उपन्यास आनन्दमठ (1882) में प्रकाशित हुआ था। यह संस्कृत और बंगाली भाषा के मिश्रण में लिखा गया है।

भारत सरकार ने राष्ट्रीय गीत के रूप में केवल प्रथम दो छंदों (stanzas) को आधिकारिक रूप से अपनाया है, लेकिन मूल गीत में कुल छह छंद हैं।

यहाँ मूल पूर्ण पाठ (देवनागरी में, जैसा सामान्यतः उद्धृत किया जाता है) दिया जा रहा है:

वन्दे मातरम् । सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् शस्यश्यामलां मातरम् । वन्दे मातरम् । शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीम् फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीम् सुहासिनीं सुमधुरभाषिणीम् सुखदां वरदां मातरम् । वन्दे मातरम् । कोटिकोटिकण्ठकलकलनिनादकराले कोटिकोटिभुजैर्धृतखरकरवाले अबला केन मा एत बले बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीम् रिपुदलवारिणीं मातरम् । वन्दे मातरम् । तुमि विद्या तुमि धर्म तुमि हृदि तुमि मर्म त्वं हि प्राणाः शरीरे बाहुते तुमि मा शक्ति हृदये तुमि मा भक्ति तोमारै प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे मातरम् । वन्दे मातरम् । त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी कमला कमलदलविहारिणी वाणी विद्यादायिनी नमामि त्वाम् नमामि कमलाम् अमलाम् अतुलाम् सुजलां सुफलां मातरम् । वन्दे मातरम् । वन्दे मातरम्! वन्दे मातरम्!!

वन्दे मातरम्!

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