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सनातन जीवन शैली में ये है शयन विधान, जानिए कब और कैसे सोना चाहिए-कब नहीं

सनातन जीवन शैली में ये है शयन विधान, कब और कैसे सोना चाहिए, How to sleep,

लाइफस्टाइल डेस्क। भारतीय जीवन शैली में जीवन के प्रत्येक क्रिया कलाप का विस्तृत वर्णन हमारे प्राचीन ग्रन्थों में किया गया है। यह अत्यन्त वैज्ञानिक, तार्किक एवं अनुभव सिद्ध है। सनातन ग्रन्थों में शयन अर्थात निद्रा के लिए भी विस्तार विधान समझाया गया है। अर्थात कब और कैसे सोना चाहिए और कैसे नहीं सोना चाहिए। किस मुद्रा में सोने से शरीर और मस्तिष्क पर क्या असर पड़ता है। आइये जानते है क्या है शयन विधान-

शयन विधान :- ’सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घंटे) के बाद ही शयन करना।’
सोने की मुद्राएं :-’
’उल्टा सोये भोगी,’
’सीधा सोये योगी,’
’दांऐं सोये रोगी,’
’बाऐं सोये निरोगी।’

शास्त्रीय विधान भी है।’ ’आयुर्वेद में ‘वामकुक्षि’ की बात आती हैं,’ अर्थात बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिये हितकर हैं।
’शरीर विज्ञान के अनुसार चित सोने से रीढ़ की हड्डी को नुकसान और औधा या ऊल्टा सोने से आँखे बिगड़ती है।’

सोते समय कितने गायत्री मन्त्र/नवकार मन्त्र गिने जाए।

’“सूतां सात, उठता आठ”सोते वक्त सात भय को दूर करने के लिए सात मंन्त्र गिनें और उठते वक्त आठ कर्मो को दूर करने के लिए आठ मंन्त्र गिनें।’
सात भय : – ’इहलोक, परलोक, आदान, अकस्मात, वेदना, मरण, अश्लोक (भय)।

दिशा ध्यानः- ’दक्षिण दिशा (South) में पाँव रखकर कभी सोना नहीं चाहिए। माना जाता है कि इस दिशा में यम का निवास है। इसके अतिरिक्त मस्तिष्क में रक्त का संचार कम को जाता है स्मृति-भ्रंश व अन्य अनेक बीमारियाँ हो जाती हैं।’ आधुनिक विज्ञान एवं वास्तुशास्त्र भी दक्षिण दिशा में पैर रखकर सोने को मना करता है।

’1ः- पूर्व ( East ) दिशा में मस्तक रखकर सोने से विद्या की प्राप्ति होती है।’
’2ः- दक्षिण (South ) में मस्तक रखकर सोने से धनलाभ व आरोग्य लाभ होता है ।’
’3ः- पश्चिम(West ) में मस्तक रखकर सोने से प्रबल चिंता होती है ।’
’4ः- उत्तर ( North ) में मस्तक रखकर सोने से हानि मृत्यु कारक होती है ।’
’अन्य धर्गग्रंथों में शयनविधि को लेकर और भी बातें सावधानी के तौर पर बताई गई हैं।’

’विशेष शयन की सावधानियाँ :-’

1ः- मस्तक और पाँव की तरफ दीपक रखना नहीं। दीपक बायीं या दायीं और कम से कम 5 हाथ दूर होना चाहिये।’
2ः- संध्याकाल में निद्रा नहीं लेनी चाहिए।’
3ः- शय्या पर बैठे-बैठे निद्रा नहीं लेनी चाहिए।’
4ः- द्वार के उंबरे या देहरी अथवा थलेटी या चौकट पर मस्तक रखकर नींद न लें।’
5ः– ह््रदय पर हाथ रखकर, छत के पाट या बीम के नीचे और पाँव पर पाँव चढ़ाकर नहीं सोना चाहिए।
6ः- सूर्यास्त के पहले सोना भी निषिद्ध माना गया है।
7ः- पाँव की और शय्या ऊँची हो तो अशुभ है। केवल चिकित्सीय उपचार हेतु ऐसा किया जा सकता है।’
8ः- शय्या पर बैठकर खाना-पीना भी वर्जित माना गया है।
9ः- सोते-सोते पढ़ना नहीं चाहिए।’
10:- ललाट पर तिलक लगाकर सोना भी अशुभ बताया जाता है।’ इसीलिए सोते वक्त तिलक मिटाने का कहा जाता है।

सनातन जीवन शैली के ज्ञान से अपने जीवन को सुखमय और स्वस्थ बनाइये। आप सभी स्वस्थ एवं आनन्द पूर्वक रहें यही बरेली लाइव परिवार की शुभकामनाएं हैं।

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