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देवस्थानम बोर्ड भंग, धामी ने त्रिवेंद्र सरकार का फैसला पलटा

देहरादून : आखिरकार उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड भंग हो ही गया। इसे भंग करने की मांग को लेकर तीर्थपुरोहित लंबे समय से आंदोलनरत थे। इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीर्थपुरोहितों को 30 नवम्बर तक का समय दिया था और आज मंगलवार को उन्होंने त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार का फैसला पलटते हुए देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की घोषणा कर दी। देवस्थानम बोर्ड पर गठित उच्च स्तरीय समिति एवं मंत्रिमंडलीय उप समिति की रिपोर्ट के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है।

त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ने वर्ष 2019 में श्राइन बोर्ड की तर्ज पर चारधाम देवस्थानम बोर्ड बनाने का फैसला लिया था। तीर्थ पुरोहितों, हकहकूकधारियों के विरोध और कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बोर्ड को मुद्दा बनाने से सरकार पर दबाव था। इसके बावजूद त्रिवेंद्र सरकार ने नौ दिसंबर, 2019 को उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम विधेयक विधानसभा से पारित कराया था। राजभवन से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन गया। सरकार ने 25 फरवरी, 2020 को इसकी अधिसूचना जारी कर बोर्ड का गठन कर दिया था। बोर्ड के अध्यक्ष मुख्यमंत्री तथा धर्मस्व व संस्कृति मंत्री इसके उपाध्यक्ष बनाए गए। गढ़वाल मंडलायुक्त रविनाथ रमन को बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया गया। इसके बाद चारधामों के तीर्थ पुरोहित व हकहकूकधारी आंदोलन पर उतर आए लेकिन,त्रिवेंद्र सरकार अपने फैसले पर अडिग रही।

चारधाम समेत 51 मंदिर थे अधीन, उपसमिति बनाई

सरकार का तर्क था कि बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम समेत 51 मंदिर बोर्ड के अधीन आने से यात्री सुविधाओं के लिए अवस्थापना विकास होगा। प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री बने तीरथ सिंह रावत ने भी जनभावनाओं के अनुरूप देवस्थानम बोर्ड पर निर्णय लेने की बात कही थी लेकिन उनके कार्यकाल में देवस्थानम बोर्ड पर सरकार आगे नहीं बढ़ पाई। फिर नेतृत्व परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री बने पुष्कर सिंह धामी ने तीर्थपुरोहितों के विरोध को देखते हुए उच्च स्तरीय कमेटी बनाने की घोषणा की।

देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम और बोर्ड को लेकर तीर्थपुरोहितों के विरोध के मद्देनजर उनकी शंकाओं के समाधान के लिए सरकार ने राज्य सभा के पूर्व सदस्य मनोहरकांत ध्यानी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। बीते दिनों समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी। मुख्यमंत्री ने समिति की रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित की। समिति के अन्य सदस्यों में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल व स्वामी यतीश्वरानंद शामिल किए गए। उपसमिति को दो दिन के भीतर संस्तुति सहित परीक्षण रिपोर्ट देने को कहा गया था

सोमवार को उपसमिति की बैठक में उच्च स्तरीय समिति की अध्ययन रिपोर्ट के सभी बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई। इसके बाद शाम को कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री को उपसमिति की परीक्षण रिपोर्ट सौंप दी। सरकार ने पहले ही साफ किया था कि 30 नवंबर तक इस विषय पर वह निर्णय ले लेगी। इसीलिए, तीर्थपुरोहितों से मंगलवार तक धैर्य बनाए रखने का आग्रह किया गया था। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद सीएम धामी ने मंगलवार सुबह ट्वीट करके कहा कि सरकार इस बोर्ड को वापस ले रही है। बाद में सभी पक्षों से बातचीत के बाद फैसला किया जाएगा कि क्या करना है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने की थी याचिका दाखिल

पिछले करीब दो साल से देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थ-पुरोहितों और सरकार के बीच टकराव बना हुआ था। विपक्षी दल भी बोर्ड के गठन का विरोध कर रहे थे। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी भी बोर्ड के खिलाफ थे। उन्होंने इसे लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की। हाईकोर्ट से याचिका खारिज हुई तो उन्होंने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रखी है लेकिन, चुनाव से ठीक पहले सरकार ने बोर्ड को भंग कर टकराव को टाल दिया।

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