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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, महिलाओं को एनडीए प्रवेश परीक्षा में बैठने की इजाजत

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने महिला उम्मीदवारों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA ,(NDA एनडीए) की प्रवेश परीक्षा में शामिल होने की छूट दे दी है। आज बुधवार को दिए गए महत्वपूर्ण आदेश में देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा है कि सेना का ‘पॉलिसी डिसिजन’ लैंगिक समानता के लिहाज से भेदभावपूर्ण है। एनडीए प्रवेश परीक्षा का आयोजन आगामी 5 सितंबर को किया जाना है।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति ह्रषिकेश रॉय की खंडपीठ ने एनडीए परीक्षा में महिलाओं के सम्मिलित होने के लिए अनुमति की मांग वाली याचिका पर यह अंतरिम आदेश जारी किया है।

महिलाओं को एनडीए की प्रवेश परीक्षा में बैठने की अनुमति की मांग वाली याचिका कुश कालरा ने द्वारा दायर की गई थी। इस याचिका में कहा गया है कि पात्र महिला उम्मीदवारों को एनडीए में शामिल होने के अवसर से वंचित करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 19 के उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि योग्य महिला उम्मीदवारों को उनके जेंडर के आधार पर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में शामिल होने के अवसर से वंचित कर दिया गया है, जो बाद में महिला अधिकारियों के लिए कैरियर में उन्नति के अवसरों में बाधा बन जाता है।

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित की जाने वाली एनडीए प्रवेश परीक्षा में गणित एवं जनरल एबिलिटी टेस्ट से सम्बन्धित दो पेपर होते हैं। दोनों ही पेपर 2 घंटे और 30 मिनट के होते हैं। गणित के पेपर के लिए 300 अंक और जनरल एबिलिटी टेस्ट के लिए 600 अंक निर्धारित होते हैं। एनडीए परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर सफल घोषित उम्मीदावरों को अगले चरण में सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) द्वारा आयोजित किये जाने वाले इंटेलीजेंस एण्ड पर्सनॉलिटी टेस्ट से गुजरना होता है।

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