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विश्व पर्यावरण दिवस के बहाने एक विनम्र निवेदन

और हां, ये पर्यावरण दिवस वैश्विक स्तर पर कैसे हो सकता है, जब मिट्टी-मौसम-जलवायु, कुछ भी पूरी धरती पर एक-सा नहीं है। ऐसे उत्सव अवश्य होने चाहिए लेकिन वैश्विक नहीं, भारतीय स्तर पर, हमारी जलवायु के अनुसार, जब हमारे यहां सही समय हो।

5 जून को सबने बड़े उत्साह से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया! देशभर में लाखों पौधे लगाए गए होंगे। बहुत सुंदर! लेकिन कोई नहीं पूछेगा उन लाखों नन्हीं जानों से कि उनका यह सही समय है भी कि नहीं।

इन पेड़ों को अधिकतर सुधीजनों ने धरती मां को सौंप अनाथ छोड़ दिया, जैसे बच्चे आप पैदा करो, पर उन्हें सड़क पर छोड़ दो। क्या अब आप नित्य उनकी देख-रेख करोगे? या सिर्फ़ ट्विटर, फ़ेसबुक पर फ़ोटो डालने के लिए ये नाटक किया???

बड़ी सामान्य-सी बात है, भारत में ज्येष्ठ मास में पौधे नहीं रोपे जाते। यहां की जलवायु ही ऐसी नहीं है।

फ़िरंगी दिमाग़ वाले तो ठीक हैं किंतु उन सुधीजनों का क्या किया जाए, जो पौधों को ईश्वर-तुल्य मानते हैं और फिर भी जाने क्यों फ़िरंगी भेड़-चाल के पीछे चलते जा रहे हैं।

और हां, ये पर्यावरण दिवस वैश्विक स्तर पर कैसे हो सकता है, जब मिट्टी-मौसम-जलवायु, कुछ भी पूरी धरती पर एक-सा नहीं है।

मानव-निर्मित चीजों-विचारों को वैश्विक स्तर पर एक शैली, एक समय में कीजिए क्योंकि वह मनुष्य का विचार है, पर हम हर चीज़ को मशीनी माध्यम से Identical /symmetric/synonymic बनाने और मनवाने के पीछे पड़े हैं…! जबकि प्रकृति का तो स्टाइल ही कण-कण में विविधता है…, जिसका बनाया हुआ न तो कोई फिंगरप्रिंट और न किसी का DNA किसी दूसरे का synonymic है।

तो फिर हम क्यों चाहते हैं कि जो, जब अमेरिका में हो रहा हो, वही उसी  समय भारत में भी हो? बड़ी सामान्य-सी बच्चों वाली बात भी समझने के लिए हमने दिमाग़ लगाना बंद कर दिया है।

अरे जून माह वास्तव में भारत का ज्येष्ठ (जेठ) माह है, जो सबसे गर्म होता है। इन दिनों भारत में बीज बोए जा सकते हैं, पूरा पौधा नहीं। इन दिनों यूरोपीय देशों में मौसम सुहावना हो सकता है, तो वे वहां पौधे लगाएं…, हम क्यों उनका अनुसरण कर रहे हैं? जब उनके यहां इसका सही समय होता है, तो वे पौधरोपण करें?… और जब हमारी जलवायु के अनुसार हमारे यहां सही समय हो, तब हम उस समय यह काम क्यों न करें?

इसी प्रकार हमारा योग दिवस 21 जून को चिलचिलाती धूप में…! वास्तव में यह उन यूरोपीय देशों की सहूलियत से मनाया जाता है और हमारे देश के करोड़ों लोग इस दिन हलकान होते रहते हैं। क्यों?

आखिर हम कब समझेंगे?

ये उत्सव अवश्य होने चाहिए लेकिन वैश्विक नहीं, भारतीय स्तर पर, हमारी जलवायु के अनुसार, जब हमारे यहां सही समय हो।

भारत में पौधे रोपिए उस समय जब उन्हें नन्हीं फुहारों में भीगने का रोमांच मिले, वरना उन्हें भीषण गर्मी में कष्ट तो न दीजिए। और अगर आप नहीं मानने वाले तो एक काम कीजिए, बीज बो दीजिए, उसे सही समय पर धरती स्वयं प्रकट कर देगी।

हम अपने देश में पौधरोपण कार्यक्रम हरियाली तीज के दिन मनायें तो कैसा रहेगा!?

और हाँ, योग-दिवस के ऐसा दिवस चुनिए जिसका भारतीय मानस, भारतीय वाङ्गमय, भारतीय परम्पराओं में महत्त्व हो। आप अपने उत्सव भारतीय स्तर पर अपनी जलवायु के अनुसार तय कीजिए न…

 डॉ अनिल गर्ग

(पूर्व संयुक्त निदेशक एवं प्रोफेसर, आईवारआई, बरेली)

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