बरेली। एक हजार साल पहले महमूद गजनवी ने सोमनाथ के मंदिर को ध्वस्त कर दिया था। प्राचीन सोमनाथ का मंदिर गुजरात में बना भगवान शिव का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। आक्रमणकारियों ने भगवान महादेव के पवित्र शिवलिंग को भी नुकसान पहुंचाया, खंडित किया। करीब एक हजार साल तक शिवलिंग के अवशेषों को पुजारियों ने गुप्त रूप से छिपाकर रखा तथा पूजा अर्चना करते रहे। शंकराचार्य की भविष्यवाणी के अनुरूप गत वर्ष पुजारियों ने यह प्राचीन शिवलिंग अवशेष दुनिया के जाने माने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जी को सौंपे। उनके ही आदेश पर उनकी संस्था आर्ट आफ लिविंग इस प्राचीन शिवलिंग के अवशेषों को लेकर एक विशाल यात्रा निकाल रही है। यात्रा सोमवार यानी छह अप्रैल को बरेली पहुंचेगी। यहां त्रिबटी नाथ मंदिर प्रांगण में श्रद्धालु इसके दर्शन कर सकते हैं।
आर्ट आफ लिविंग के नेशनल मीडिया कोर्डिनेटर पार्थो कुनार ने बताया कि यह आयोजन साधारण आयोजन नहीं है। इसमें आध्यात्म, इतिहास और हमारी प्राचीन संस्कृति का समावेश है। अब से ठीक एक हजार साल पहले 1026 ईसवीं में आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने सोमनाथ के पवित्र मंदिर को ध्वस्त कर दिया था, लेकिन आस्थावानों ने अपने हौसलों से धर्मपताका को उठाये रखा। पवित्र शिवलिंग के अवशेष अग्निहोत्री पुजारियों ने 900 साल तक संभालकर रखे। गुप्त रूप से सुरक्षित कर पूजा अर्चना करते रहे, पीढ़ी दर पीढ़ी, इस शिवलिंग के अवशेष संरक्षित होते रहे। 1925 में कांची के शंकराचार्य जी ने भविष्यवाणी की कि इन अवशेषों को उचित समय पर ऐसे योग्य आध्यात्मिक नेतृत्व को सौंपा याजेगा जिनके नाम में ही शंकर होंगे। जनवरी 2025 में परंपरा के अंतिम संरक्षक श्री सीताराम शास्त्री ने महाशिवरात्रि के अवसर पर दुनिया के जाने माने आध्यात्मिक संत गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी को यह अवशेष प्रदान किये।
श्री कुनार ने बताया कि आर्ट आफ लिविंग इन्हीं अवशेषों के साथ देश में एक यात्रा निकाल रही है। जिससे देशवासी दर्शन कर सकें। यहां सिर्फ शिवलिंग के दर्शन ही नहीं हैं, यह प्राचीन शिवलिंग आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है और हमारे बने बिगड़े इतिहास की जीवंत निशानी भी है। पार्थो कुनार के अनुसार बरेली में यात्रा छह अप्रैल को पहुंच रही है। प्रेमनगर के त्रिबटी नाथ मंदिर में सुबह साढ़े आठ बजे से दोपहर एक बजे तक पूजा व आर्ट आफ लिविंग का भजन संकीर्तन व दर्शन होगा। आर्ट आफ लिविंग परिवार की श्वेता कुनार ने एक प्रेस वार्ता में सभी श्रद्धालुओं से भगवान सोमनाथ के प्राचीन स्वरुप के दर्शन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हमारी नाथ नगरी में भगवान सोमनाथ महादेव स्वयं पधार रहे हैं। ऐसे में उनके दर्शनों का ऐसा ऐतिहासिक व पवित्र अवसर दोबारा नहीं मिलेगा। इस अवसर पर आर्ट आफ लिविंग संस्था के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।






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