bareillylive@bareillynews:सितंबर में पर्याप्त डीएपी उपलब्ध कराने की मांग, औद्योगिक क्षेत्र के दूषित पानी और खुले गड्ढों पर जताई नाराजगी
फरीदपुर, बरेली। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के बैनर तले शनिवार को फरीदपुर ब्लॉक प्रांगण में मासिक किसान पंचायत आयोजित की गई। पंचायत में किसानों की विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद किसानों की मांगों से संबंधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी को संबोधित करते हुए तहसीलदार फरीदपुर प्रशांत अवस्थी को सौंपा गया। ज्ञापन मंडल उपाध्यक्ष उपदेश सिंह के नेतृत्व में दिया गया।
किसान पंचायत में सबसे प्रमुख मुद्दा आगामी सितंबर माह में किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद उपलब्ध कराने का रहा। किसानों ने कहा कि फसलों की तैयारियों को देखते हुए समय रहते पर्याप्त मात्रा में खाद की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को खाद के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े। किसानों ने प्रशासन से खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखने की मांग की।
पंचायत में अंडरग्राउंड जियो फाइबर केबल डालने के दौरान खोदे जा रहे गड्ढों का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों ने आरोप लगाया कि केबल डालने के बाद जॉइंट वाले स्थानों पर कई जगह गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं, जिससे राहगीरों और ग्रामीणों के लिए हादसे का खतरा बना रहता है। किसानों ने संबंधित विभाग से सभी खुले गड्ढों को तत्काल बंद कराने की मांग की।
ग्राम डगरोली में सीसी रोड का मामला भी पंचायत में प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने बताया कि जलकल विभाग द्वारा सीसी रोड को तोड़े जाने के बाद उसका पुनर्निर्माण नहीं कराया गया है। इससे ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। किसानों ने क्षतिग्रस्त सड़क की जल्द मरम्मत कराने की मांग की।
इसके अलावा फरीदपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण का मुद्दा किसानों ने गंभीरता से उठाया। किसानों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर पॉलिथीन कचरा जलाए जाने से वातावरण प्रदूषित हो रहा है। वहीं औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले दूषित पानी को बिना उचित शोधन के जमीन में छोड़े जाने की शिकायत भी की गई।
किसानों ने कहा कि दूषित पानी के खेतों में पहुंचने से मिट्टी की गुणवत्ता और फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने संबंधित विभाग से औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण की जांच कराने, दूषित पानी के निस्तारण की व्यवस्था की निगरानी करने और दोषी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की। किसानों ने आशंका जताई कि दूषित जल से फसलों की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
किसान पंचायत के बाद तहसीलदार को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने सभी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराने की मांग की।






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