bareillylive@bareillynews:उर्स-ए-रज़वी के आखिरी दिन कुल शरीफ से पहले नबीरे आला हज़रत का संदेश, नौजवानों को नशे और फिजूलखर्ची से बचने की नसीहत
बरेली। उर्स-ए-रज़वी के तीसरे और आखिरी दिन नबीरे आला हज़रत एवं ऑल इंडिया रज़ा एक्शन कमेटी (आरएसी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने कौम को दीनी तालीम, इश्क़-ए-रसूल और आला हज़रत की तालीमात पर अमल करने का संदेश दिया। कुल शरीफ से ठीक पहले अपने खिताब में उन्होंने कहा कि मुसलमान अपने बच्चों को दीनी तालीम दें और इश्क़-ए-रसूल व आशिक़-ए-रसूल की मोहब्बत को अपने दिलों में मजबूत करें।
ख्वाजा कुतुब स्थित आरएसी मुख्यालय बैतुर्रज़ा से लेकर मरकजी मस्जिद बीबी जी तक का इलाका रोशनी और सजावट से जगमगा उठा। बैतुर्रज़ा में 108वें उर्स-ए-रज़वी की नूरानी महफिल का आयोजन किया गया। महफिल की सरपरस्ती मौलाना अफरोज रज़ा क़ादरी और सदारत मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने की। मौलाना नकी अंजुम ने तिलावत-ए-कुरान से महफिल का आगाज किया। इसके बाद नात-ओ-मनकबत और तकरीरों का सिलसिला चला।
कुल शरीफ से पहले मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने विशेष खिताब करते हुए नौजवानों को हर तरह के नशे से दूर रहने की नसीहत की। उन्होंने कहा कि युवा अपनी सेहत, ईमान और मेहनत की कमाई की हिफाजत करें तथा फिजूलखर्ची से बचें। उन्होंने घरों में दीनी माहौल बनाने, आला हज़रत की तालीमात पर अमल करने और इश्क़-ए-रसूल को अपने सीनों में बसाए रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि समाज की नई पीढ़ी को बेहतर तालीम और सही संस्कार देना जरूरी है, ताकि वे दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाबी हासिल कर सकें। इससे पहले मुफ्ती उमर रज़ा और मौलाना सलीम रज़ा ने भी तकरीरें कीं। हाफिज इमरान रज़ा बरकाती ने निजामत की। अंत में आला हज़रत का लिखा सलाम “मुस्तफा जान-ए-रहमत” पढ़ा गया और मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी ने मुल्क, कौम और पूरी दुनिया में अमन-ओ-सुकून के लिए विशेष दुआ की।
लंगर और जायरीनों की खिदमत में जुटे रहे आरएसी वॉलंटियर्स
कुल शरीफ की महफिल के बाद लंगर-ए-आम शुरू हुआ। ख्वाजा कुतुब स्थित आरएसी मुख्यालय बैतुर्रज़ा, बिहारीपुर करोलान, खलील स्कूल, कुल्हाड़ापीर और जंक्शन स्थित माल गोदाम रोड सहित कई स्थानों पर जायरीनों के लिए लंगर जारी रहा। बैतुर्रज़ा में शिकंजी का लंगर भी कराया गया। नबीरे आला हज़रत बुरहान रज़ा क़ादरी ने बैतुर्रज़ा पर आइसक्रीम का लंगर कराया।
उर्स के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए जायरीनों ने दरगाह आला हज़रत पर हाजिरी दी और मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी से मुलाकात कर दुआएं लीं। आरएसी के वॉलंटियर्स तीनों दिन शहर के विभिन्न इलाकों में जायरीनों की मदद के लिए मुस्तैद रहे। जहां भी जायरीनों को आवागमन या अन्य किसी प्रकार की परेशानी हुई, वॉलंटियर्स ने तत्काल मदद पहुंचाई।
चादरों के जुलूस और यातायात व्यवस्था में भी किया सहयोग
आरएसी वॉलंटियर्स ने कई स्थानों पर चादरों के जुलूसों को दरगाह तक पहुंचाने में सहयोग किया। देर रात किला क्षेत्र में यातायात व्यवस्था प्रभावित होने पर वॉलंटियर्स पुलिस के सहयोग के लिए पहुंचे और रास्ता सुचारु कराने में मदद की। कुल शरीफ के बाद वापस लौट रहे जायरीनों को बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने में भी आरएसी वॉलंटियर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस मौके पर सय्यद सबूर अली, अम्मार वसीम, हन्नान उद्दीन रज़ा, अली रज़ा क़ादरी, मौलाना क़मरुज्जमां, मुफ्ती मजाज़ रज़ा, मौलाना सलीम रज़ा, मौलाना सय्यद तौकीर रज़ा, मौलाना क़ारी ज़फर, मौलाना सफदर रज़ा, मौलाना अब्दुल क़ादिर, मौलाना तहसीन रज़ा, मौलाना आकिब रज़ा, मौलाना आरिफ रज़ा, मौलाना गुलफाम हसन, मौलाना अफजल खां, मुफ्ती आमिर जफर, मौलाना रफी, मौलाना ताज रज़ा, मौलाना आदिल रज़ा, मौलाना सद्दाम रज़ा, मौलाना शाहिद रज़ा, मौलाना मीर हसन, मौलाना निजाम नूरी, मौलाना नादिर रज़ा, मौलाना अफजल रज़ा और मौलाना कारी अजीम रज़ा समेत बड़ी संख्या में उलेमा मौजूद रहे।
आरएसी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में मुशाहिद रफत, राजू बाबा, अब्दुल लतीफ कुरैशी, मुहम्मद जुनैद, सईद सिब्तैनी, हनीफ अजहरी, सय्यद मुशर्रफ हुसैन, अंजुम हजरत, मुमताज अहमद, गुलजार अहमद, सज्जाद अहमद, मोहम्मद उवैस, मौलाना अफलाक, फैजान अहमद, सय्यद रिजवान, रेहान यार खां, मुहम्मद चांद, उवैस खां, इब्ने हसन, मुहम्मद ताहिर, इश्तियाक हुसैन सहित सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जबलपुर से सरफराज आलम खां के नेतृत्व में पहुंची बड़ी टीम ने भी मौलाना अदनान रज़ा क़ादरी से मुलाकात कर दुआएं लीं और दरगाह पर हाजिरी दी। उर्स के दौरान आरएसी वॉलंटियर्स की ओर से की गई सेवाओं और जायरीनों की मदद को लेकर आयोजकों ने कार्यकर्ताओं का आभार जताया।






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