Bareillylive : श्री रामायण मंदिर, माधवबाड़ी में चल रहे तुलसी जयंती महोत्सव के पंचम दिवस पर कथा व्यास पूज्य श्री धनवंतरी दास जी महाराज ने किशोरा कथा के माध्यम से श्रेष्ठ श्रोताओं का स्वरूप स्पष्ट किया।
महाराज जी ने कहा कि उत्तम श्रोता मछली के समान होना चाहिए — जिस प्रकार मछली का जीवन जल से जुड़ा होता है, उसी प्रकार श्रोता का समर्पण कथा से अटूट होना चाहिए। “सुखी मीन जहां नीर अगाधा”, उन्होंने बताया कि कथा श्रवण से आनंद, आंतरिक ऊर्जा और आत्म-अनुभूति विकसित होती है।
कथा में महाराज ने महादेव के अटल भक्तत्व का उदाहरण देते हुए कहा कि वे सदैव राम नाम का जप करते रहते हैं और राम नाम आश्रय लेने पर आश्चर्यजनक साधना-फल मिलता है।
उन्होंने बताया कि भगवान शिव ने राम नाम के सहारे 47 वर्षों तक समाधि की अवस्था में स्थित रहकर यह सिद्ध किया कि निरंतर नाम जपूँने से ग्रहियों और जीवन स्थितियों का प्रभाव कम हो जाता है।
साथ ही महाराज ने कहा कि जब भगवान जानकीनाथ साधक पर कृपा करते हैं तो सभी ग्रह शांत हो जाते हैं और उपासक में अपने देवता के गुण, धर्म एवं लक्षण प्रकट होते हैं।
पंचम दिवस का मुख्य आकर्षण श्रीराम जन्मोत्सव का भव्य आयोजन रहा। कथा के दौरान भक्तिमयी वातावरण तब चरम पर पहुंचा जब महाराज जी ने “भए प्रगट कृपाला दीन दयाला…” भजन गाया और श्रद्धालुओं ने “राम लला की जय” का उद्घोष किया। उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हुए और छोटे-छोटे बच्चों को राम रूप में देखकर उत्साह बढ़ा। राम कथा के यजमान श्री राधे श्याम भाटिया एवं श्रीमती नीतू भाटिया उपस्थित रहे।






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