bareillylive@bareillynews:प्रदर्शनकारियों ने कहा—संविधान सम्मत सामाजिक न्याय, समान अवसर और सामाजिक समरसता सुनिश्चित करना उद्देश्य
बरेली। यूजीसी के कुछ प्रावधानों और आरक्षण व्यवस्था को लेकर प्रदर्शनकारियों ने धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगें उठाईं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय के अधिकारों का विरोध करना नहीं, बल्कि संविधान सम्मत सामाजिक न्याय, समान अवसर और सामाजिक समरसता सुनिश्चित करना है।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू विवादित यूजीसी प्रावधानों की व्यापक समीक्षा की जाए और आवश्यक होने पर उन्हें वापस लिया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इससे विद्यार्थियों के हितों और समानता के सिद्धांत की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
आरक्षण व्यवस्था की निष्पक्ष समीक्षा की मांग

प्रदर्शनकारियों ने वर्तमान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरक्षण व्यवस्था की निष्पक्ष समीक्षा की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद, गरीब और वंचित परिवारों तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखने के संबंध में भी विचार किए जाने की मांग की, ताकि व्यवस्था का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सके।
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र की प्रक्रिया सरल करने की मांग
इसके साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए और पात्र लोगों को समय पर इसका लाभ मिलना चाहिए।
मांगें नहीं मानी तो जारी रहेगा शांतिपूर्ण आंदोलन
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे संविधान और कानून के दायरे में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखेंगे।
धरना प्रदर्शन में ज्योति मिश्रा, संजीव शंखधार, जय नारायण गुप्ता, मंजू गुप्ता, आरती तोमर, जयवीर सिंह, आलोक सक्सेना, विजेंद्र सिंह प्रधान, गजेंद्र पांडेय, सर्वेश्वर पाल सिंह, सोनू ठाकुर, बिक्की पंडित, स्वदेश सिंह और सुधीर शर्मा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।






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