बरेली@BareillyLive : श्री हरि मंदिर में चल रहे 66वें भक्ति ज्ञान वार्षिक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एवं श्री राधाष्टमी महोत्सव का समापन धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ। इस अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। राधा रानी के प्राकट्य महोत्सव पर मंदिर परिसर भक्ति, भजनों और जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम में पंडित श्री रामदेव शास्त्री ने श्री राधा नाम की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को सत्संग की गंगा में गोता लगवाया। पानीपत से पधारीं परम श्रद्धेय श्री श्री 108 श्रीमती कांता देवी हरमिलापी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि प्रभु का सहारा ही सबसे प्यारा है।
उन्होंने कहा कि संसार से जुड़ने पर मनुष्य को दुखों का सामना करना पड़ता है, जबकि भगवान का बन जाने पर सुख-दुख में कोई अंतर नहीं रह जाता। भगवान के चरणों की अनुभूति ही जीवन का वास्तविक कल्याण है।
उन्होंने कहा कि आज ब्रज की महारानी श्री राधा रानी का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। श्री राधा रानी परम दयालु और भक्तवत्सल हैं। जिस भक्त पर उनकी कृपा हो जाती है, उस पर भगवान श्रीकृष्ण की कृपा स्वतः हो जाती है। भगवान को पाना है तो राधा रानी का बनना होगा। उन्होंने कहा कि बरसाने में मंगल गीत गाए जा रहे हैं और श्री राधा रानी के प्रकट होने से चारों ओर खुशियां छाई हैं।
धार्मिक सेवा समिति और महिला संकीर्तन मंडल की ओर से भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी गई। ‘बरसाना मोहे प्यारो लागे’, ‘तेरी बिगड़ी बना देगी चरण रज राधा रानी की’, ‘करुणामयी कृपामयी दयामयी श्री राधे’, ‘लाडली अद्भुत नजारा तेरे बरसाने में है’ तथा ‘मेरा मन लागे बरसाने में’ सहित अनेक भजनों ने वातावरण को राधामय बना दिया। श्रद्धालुओं ने ‘हम हो गए राधा रानी के’ और ‘हम हो गए श्यामा प्यारी के’ के जयकारे लगाए।
श्री हरमिलापी महाराज ने मंदिर समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों और सेवादारों को पुरस्कार एवं आशीर्वाद देकर सम्मानित किया। अंत में मंदिर प्रबंध समिति के सचिव रवि छाबड़ा ने 17 दिवसीय वार्षिक महोत्सव में सहयोग देने वाले सभी भक्तों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी के लिए श्री राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण से मंगलकामना की।
समापन अवसर पर लगभग 20 हजार श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष सुशील अरोड़ा, सचिव रवि छाबड़ा, उपाध्यक्ष अश्वनी ओबेरॉय सहित मंदिर समिति, महिला सेवा समिति, महिला संकीर्तन मंडल और युवा मंडल के सदस्यों का विशेष सहयोग रहा।






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