वर्चुअल हिन्दी बनी ग्लोबल भाषा : डॉ. सुरेश बाबू मिश्रा
बरेली। अखिल भारतीय साहित्य परिषद ब्रज प्रांत, बरेली के तत्वावधान में हिन्दी पखवाड़े के अंतर्गत राष्ट्र साधना के सौ वर्ष, काव्योत्सव एवं सम्मान समारोह का आयोजन टीवरीनाथ संस्कृत महाविद्यालय में किया गया। कार्यक्रम में 200 से अधिक छात्र-छात्राओं के साथ करीब 50 साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। समारोह की अध्यक्षता प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. सुरेश बाबू मिश्रा ने की, जबकि महाविद्यालय के प्राचार्य बंशीधर पाण्डेय मुख्य अतिथि रहे। कवयित्री नीलिमा रावत की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
मुख्य अतिथि बंशीधर पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, स्वाभिमान, संस्कृति और संस्कारों की भाषा है। इसके प्रचार-प्रसार के लिए सभी को समर्पित भाव से कार्य करना चाहिए। बरेली महाविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष रहे प्रोफेसर डॉ. एसपी मौर्य ने कहा कि हिन्दी का प्रयोग करने में संकोच नहीं, बल्कि गर्व होना चाहिए।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा कि आज वर्चुअल हिन्दी ग्लोबल भाषा बन चुकी है। विश्व के विभिन्न देशों में हिन्दी बोली और समझी जाती है। उन्होंने कहा कि हिन्दी का भविष्य उज्ज्वल है और यह लगातार वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रही है।
समारोह में आयोजित काव्यगोष्ठी में डॉ. ब्रजेश कुमार शर्मा, विमलेश चन्द्र दीक्षित, गंगाराम पाल, डॉ. अखिलेश कुमार गुप्ता, डॉ. एसपी मौर्य, प्रोफेसर विनीता सिंह, निरुपमा अग्रवाल, एसके कपूर, आरोही, नीलिमा रावत, प्रदीप रावत, डॉ. अनिल मिश्रा, गणेश पथिक और रंजीता नागपाल सहित कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर हिन्दी एवं संस्कृत के 30 साहित्यकारों को आदि कवि वाल्मीकि सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. सुरेश बाबू मिश्रा, प्राचार्य बंशीधर पाण्डेय, वरिष्ठ साहित्यकार निरुपमा अग्रवाल एवं डॉ. एसपी मौर्य ने सम्मानित साहित्यकारों को पटका पहनाकर स्मृति चिह्न प्रदान किए।
कार्यक्रम का संचालन प्रांतीय संयुक्त महामंत्री निरुपमा अग्रवाल ने किया। जनपदीय मंत्री विमलेश चन्द्र दीक्षित ने आभार व्यक्त किया। वंदेमातरम् के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।






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