लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में क्षेत्रीय संतुलन के साथ सामाजिक और जातीय समीकरणों को खास तवज्जो दी है। भाजपा की सूची में संगठन से जुड़े नेताओं के साथ दो महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।
भाजपा ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह और श्रुति गंगवार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है।
भाजपा की सूची में किस जातीय वर्ग को कितना प्रतिनिधित्व?
भाजपा के आठ उम्मीदवारों के चयन में पिछड़ा, दलित और सवर्ण वर्गों के बीच संतुलन साधने की कोशिश दिखाई देती है। पार्टी ने तीन अति पिछड़ी जातियों, दो अनुसूचित जाति, दो ब्राह्मण और एक क्षत्रिय बिरादरी से जुड़े नेताओं को मौका दिया है।
दो महिला उम्मीदवारों को भी सूची में जगह मिली है। पार्टी ने इसके जरिए संगठनात्मक निष्ठा के साथ-साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व का संदेश देने की कोशिश की है।
यूपी के छह क्षेत्रों में साधा क्षेत्रीय संतुलन
भाजपा ने उत्तर प्रदेश को संगठनात्मक रूप से पश्चिम, ब्रज, कानपुर-बुंदेलखंड, काशी, गोरखपुर और अवध समेत छह क्षेत्रों में बांटा है। राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में इन क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है।
पार्टी की रणनीति को आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। राज्य में विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, ऐसे में राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची के जरिए भाजपा ने अलग-अलग सामाजिक समूहों को साधने की कोशिश की है।
धर्मपाल सिंह को मौका, लोध समाज पर भाजपा का भरोसा
उत्तर प्रदेश सरकार में पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह को भाजपा ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। वह बरेली जिले की आंवला विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं और लोध समाज से आते हैं।
धर्मपाल सिंह को राज्यसभा भेजने के फैसले को लोध समुदाय के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इसी समुदाय से आने वाले बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने वाला है और उन्हें इस बार दोबारा मौका नहीं दिया गया है।
लोध समाज का उत्तर प्रदेश की राजनीति में खासा प्रभाव माना जाता है। दिवंगत कल्याण सिंह भी इसी बिरादरी से आते थे और उनके नेतृत्व में प्रदेश में भाजपा की पहली सरकार बनी थी।
प्रकाश पाल के जरिए अति पिछड़ा वर्ग को साधने की कोशिश
भाजपा ने उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल को भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। वह गड़रिया और धनगर समाज से आते हैं।
प्रकाश पाल को टिकट दिए जाने के पीछे राजनीतिक तौर पर एक और अहम समीकरण देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल और बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल भी इसी समाज से आते हैं।
ऐसे में भाजपा की कोशिश इस सामाजिक वर्ग में अपना प्रभाव बढ़ाने की दिखाई दे रही है।
श्रुति गंगवार के जरिए महिला और कुर्मी वोट बैंक पर नजर
भाजपा ने झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। उनके चयन के जरिए पार्टी ने महिला प्रतिनिधित्व के साथ-साथ कुर्मी समाज को भी प्रतिनिधित्व दिया है।
उत्तर प्रदेश में कुर्मी समाज का राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और एनडीए की सहयोगी अपना दल (एस) की प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल भी कुर्मी समाज से आती हैं।
2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों में कुर्मी मतदाताओं के समाजवादी पार्टी की ओर झुकाव की चर्चा के बीच भाजपा का यह फैसला खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विद्यासागर सोनकर: पुराने संगठनात्मक कार्यकर्ता को मिला बड़ा मौका
भाजपा ने दलित वर्ग से जुड़े अपने पुराने संगठनात्मक कार्यकर्ता विद्यासागर सोनकर को भी राज्यसभा का टिकट दिया है।
सोनकर पूर्व विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं और परिसीमन से पहले सैदपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी रहे हैं। वह भाजपा की प्रदेश इकाई में महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
पार्टी के भीतर लंबे समय से प्रदेश अध्यक्ष पद की संभावित दौड़ में उनका नाम आता रहा है। संगठन में शुरुआती दौर से सक्रिय सोनकर ने जौनपुर नगर पालिका के पार्षद के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी।
प्रियंका सिंह रावत की वापसी, संगठन ने फिर जताया भरोसा
भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका सिंह रावत को भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है। वह 2014 में भाजपा के टिकट पर बाराबंकी से लोकसभा सांसद निर्वाचित हुई थीं।
हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। टिकट कटने के बाद उनकी नाराजगी सार्वजनिक रूप से सामने आई थी, लेकिन उन्होंने संगठन के साथ अपना जुड़ाव बनाए रखा।
अब राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने उन्हें एक बार फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है।
सवर्ण समीकरण में राम प्रताप सिंह, राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय
भाजपा ने अगड़े वर्ग से जुड़े नेताओं को भी प्रतिनिधित्व दिया है। राम प्रताप सिंह चौहान आगरा जिले से विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में भाजपा की प्रदेश इकाई में महामंत्री हैं।
ब्राह्मण समाज से आने वाले राधाकांत ओझा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता हैं। वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें फूलपुर सीट से संभावित दावेदारों में माना जा रहा था।
वहीं गोपी कृष्ण पांडेय कानपुर क्षेत्र से आते हैं और लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं। वह भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारी भी रह चुके हैं।
भाजपा ने मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को क्यों नहीं दिया दोबारा मौका?
उत्तर प्रदेश से भाजपा के अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी और हरदीप सिंह पुरी का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला है।
इनमें से किसी को भी भाजपा ने इस बार दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया है। इनमें केंद्र सरकार के दो मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा भी शामिल हैं।
वहीं, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद डॉ. दिनेश शर्मा ने पिछले महीने राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था।
सपा के तीसरे उम्मीदवार और भाजपा के नौवें प्रत्याशी पर टिकी नजर
भाजपा द्वारा आठ उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब राजनीतिक निगाहें समाजवादी पार्टी के तीसरे उम्मीदवार और भाजपा के संभावित नौवें उम्मीदवार पर टिक गई हैं।
सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतार सकती है। यदि सपा तीसरा प्रत्याशी उतारती है और भाजपा नौवां उम्मीदवार मैदान में लाती है, तो राज्यसभा चुनाव में मतदान की स्थिति बन सकती है।
अगर ऐसा नहीं हुआ तो भाजपा के आठ और सपा के दो उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जाएगा।
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के बीच दोनों दलों ने अपनी रणनीति को लेकर सस्पेंस बनाए रखा है। सपा ने नामांकन पत्रों के तीन सेट खरीदे हैं, जबकि भाजपा ने नौ सेट खरीदकर मुकाबले की संभावनाओं को खुला रखा है।
भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा उम्मीदवार प्रकाश पाल ने उम्मीदवार घोषित होने के बाद कहा कि पार्टी के सभी उम्मीदवार आसानी से जीतेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा नौवें उम्मीदवार की जीत भी सुनिश्चित कर सकती है।
16 अक्टूबर को होगा यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले होने वाला यह चुनाव भाजपा और सपा दोनों के लिए शक्ति परीक्षण के तौर पर देखा जा रहा है।
फिलहाल भाजपा ने आठ उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। अब यह देखना अहम होगा कि समाजवादी पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारती है या नहीं और भाजपा नौवें प्रत्याशी के साथ चुनाव को मुकाबले में बदलती है या फिर सभी उम्मीदवार निर्विरोध राज्यसभा पहुंचते हैं।





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