Bareillylive : अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में प्रसिद्ध कथाकार एवं उपन्यासकार गौरा पंत शिवानी की जयंती के अवसर पर राजेंद्र नगर स्थित कार्यक्रम स्थल पर साहित्यिक गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता कहानीकार निरुपमा अग्रवाल ने की, जबकि कार्यक्रम का शुभारंभ डा. व्रजेश कुमार शर्मा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष डा. सुरेश बाबू मिश्रा ने कहा कि गौरा पंत शिवानी मर्मस्पर्शी कहानियों की कालजयी कथाशिल्पी थीं। उनकी रचनाओं में आम आदमी के सुख-दुख, आशा-आकांक्षाओं और सामाजिक यथार्थ का सजीव चित्रण मिलता है। उनकी कहानियां पाठक के हृदय को सीधे छू जाती हैं और उन्हें जीवन के विविध पहलुओं से जोड़ती हैं।
डा. मिश्रा ने बताया कि शिवानी जी ने अपनी समृद्ध साहित्य यात्रा के दौरान बारह उपन्यास, चार कहानी संग्रह और चार संस्मरण संग्रह की रचना की। उनकी कृतियां हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर हैं। उनके प्रसिद्ध उपन्यास कृष्ण कली के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण सम्मान से विभूषित किया था। उन्होंने कहा कि शिवानी की लेखनी ने हिंदी कथा साहित्य को नई ऊंचाई प्रदान की और उनकी रचनाएं आज भी पाठकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हैं।
जनपदीय अध्यक्ष डा. व्रजेश कुमार शर्मा ने कहा कि गौरा पंत शिवानी के दो उपन्यासों को धर्मयुग पत्रिका ने धारावाहिक रूप में प्रकाशित किया था। इससे उनकी लेखनी और नाम घर-घर तक पहुंच गया। उनके उपन्यासों ने पारिवारिक संबंधों, सामाजिक मूल्यों और मानवीय भावनाओं को सहज एवं प्रभावी ढंग से उकेरा। उन्होंने कहा कि शिवानी जी की रचनाएं आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं
अध्यक्षीय उद्बोधन में कहानीकार निरुपमा अग्रवाल ने कहा कि शिवानी की कहानियों और उपन्यासों में तत्कालीन समाज का प्रतिबिंब स्पष्ट रूप से झलकता है। उनकी रचनाओं में स्त्री जीवन, पारिवारिक जटिलताओं और सामाजिक परिवर्तन के विविध पक्षों को सूक्ष्म दृष्टि से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने शिवानी के कई प्रसिद्ध उपन्यासों के प्रसंग साझा किए और कहा कि उनकी भाषा सरल, प्रवाहमयी तथा भावपूर्ण है, जो पाठक को रचना से जोड़े रखती है।
इस अवसर पर विमलेश चंद्र दीक्षित, शिव ओम शर्मा, डा. विनीता सिंह, गंगाराम पाल और रमेश रंजन ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। संजीव कुमार शर्मा गंभीर एवं निर्भय सक्सेना भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर विनीता सिंह ने किया, जबकि विमलेश चंद्र दीक्षित ने उपस्थित सभी साहित्य प्रेमियों एवं वक्ताओं का आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों ने कहा कि गौरा पंत शिवानी की जयंती पर आयोजित यह गोष्ठी उनकी साहित्यिक देन को याद करने और नई पीढ़ी को उनकी रचनाओं से परिचित कराने का सार्थक अवसर रही।साभार : निर्भय सक्सेना






Leave a Reply