बाल साहित्यकार निरंकार देव सेवक की 32वीं पुण्यतिथि पर हरीश चन्द्र कश्यप का सारस्वत अभिनंदन, रुहेलखंड विश्वविद्यालय में शोधपीठ स्थापना की उठी मांग

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तीन दिवसीय स्मृति समारोह का समापन, साहित्यकारों ने सर्वसम्मति से पारित किया प्रस्ताव; सेवक की बाल कविताओं से गूंजा सभागार

बरेली@bareillylive:बरेली। सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार निरंकार देव सेवक की 32वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में निरंकार देव सेवक बाल साहित्य संस्थान की ओर से आयोजित तीन दिवसीय स्मृति समारोह का समापन गुरुवार को बिहारीपुर स्थित शब्दांगन सभागार में हुआ। समारोह के अंतिम दिन समाजसेवा और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हरीश चन्द्र कश्यप का सारस्वत अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर साहित्यकारों ने महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में निरंकार देव सेवक के नाम पर बाल साहित्य शोधपीठ स्थापित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया।

पगड़ी, उत्तरीय और स्मृति चिह्न भेंटकर किया सम्मान

समारोह में संस्थान के अध्यक्ष इंद्रदेव त्रिवेदी, उपाध्यक्ष डॉ. सुरेश रस्तोगी और संयुक्त सचिव रामकुमार अफरोज़ ने समाजसेवी हरीश कश्यप को मोतियों की माला पहनाकर, पगड़ी, उत्तरीय, स्मृति चिह्न और पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मानित किया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद हरीश चन्द्र कश्यप ने संस्थान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाजसेवा और साहित्य के प्रति अनुराग उन्हें बचपन से ही संस्कारों के रूप में मिला है। ऐसे सम्मान व्यक्ति को समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का और अधिक गंभीरता से निर्वहन करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें भविष्य में और अधिक रचनात्मक एवं सामाजिक कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने निरंकार देव सेवक को बाल साहित्य का पुरोधा बताते हुए उनके साहित्यिक योगदान को अविस्मरणीय बताया।

निरंकार देव सेवक के नाम पर शोधपीठ स्थापित करने का प्रस्ताव

संस्थान के अध्यक्ष इंद्रदेव त्रिवेदी ने निरंकार देव सेवक के जीवन और साहित्यिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सेवक ने बाल साहित्य के साथ प्रौढ़ साहित्य को भी अपनी रचनात्मक प्रतिभा से समृद्ध किया। उनकी रचनाओं में बाल मनोविज्ञान, सहज अभिव्यक्ति और जीवन मूल्यों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।

इंद्रदेव त्रिवेदी ने प्रस्ताव रखा कि एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में बाल साहित्य के अध्ययन, शोध, विकास और संरक्षण के उद्देश्य से निरंकार देव सेवक के नाम पर एक शोधपीठ स्थापित की जानी चाहिए। सभागार में उपस्थित साहित्यकारों और गणमान्य नागरिकों ने तालियां बजाकर प्रस्ताव का समर्थन किया।

हरीश कश्यप के सामाजिक योगदान को सराहा

नाथ नगरी के राजा सेवा समिति के अध्यक्ष विकास मेहरोत्रा ने हरीश चन्द्र कश्यप के जीवन और सामाजिक कार्यों का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहकर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए उनके कार्यों की सराहना की।

मेहरोत्रा ने कहा कि हरीश कश्यप कर्मठ, लगनशील और समाज के प्रति समर्पित व्यक्तित्व हैं। उनका जीवन समाजसेवा और संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देता है।

‘तुम बनो किताबों के कीड़े, हम खेल रहे मैदानों में’ पर गूंजी तालियां

समारोह का साहित्यिक आकर्षण निरंकार देव सेवक की बाल कविताओं का पाठ रहा। साहित्यकार संतोष कपूर ने सेवक की लोकप्रिय कविता की पंक्तियां सुनाईं—

हम सखा तितलियों के बनकर, उड़ते फिरते उद्यानों में।
तुम बनो किताबों के कीड़े, हम खेल रहे मैदानों में।।

कविता की इन पंक्तियों ने उपस्थित साहित्यप्रेमियों को आनंदित कर दिया। सभागार तालियों से गूंज उठा। कविता के माध्यम से बच्चों के स्वाभाविक खेलकूद, प्रकृति प्रेम और स्वतंत्र बालमन की सुंदर अभिव्यक्ति सामने आई।

साहित्यकारों और गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति

समारोह में डॉ. सुरेश रस्तोगी, विकास मेहरोत्रा, सुनील रस्तोगी, संतोष कपूर, जितेंद्र कुमार मिश्रा, रामकुमार अफरोज़, अवनीश कुमार शर्मा, लवलीन कपूर, विनोद कुमार गुप्ता, प्रदीप कुमार रस्तोगी, सुबोध अग्रवाल, अभिषेक और शौर्य पचौरी सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन संस्थान के अध्यक्ष इंद्रदेव त्रिवेदी ने किया, जबकि सुनील रस्तोगी ने सभी अतिथियों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया।

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