@bareillylive : बरेली कॉलेज, बरेली के ललित कला विभाग में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आनंद लखटकिया के चित्रों की एकल प्रदर्शनी “दृश्य के आर-पार” का भव्य उद्घाटन 28 अक्टूबर को प्रातः 11:30 बजे किया गया। उद्घाटन काजी अलीमुद्दीन, डॉक्टर शशी राठी, रजनी अग्रवाल, वाराणसी से आईं प्रोफेसर मंजुला चतुर्वेदी तथा बरेली कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर ओ.पी. राय ने दीप प्रज्वलित कर संयुक्त रूप से किया।
समारोह में नगर के अनेक सम्मानित अतिथियों के साथ बरेली कॉलेज के अधिकांश शिक्षकगण उपस्थित रहे। अतिथियों ने प्रदर्शित चित्रों की सराहना करते हुए कलाकार के अथक श्रम, कला-दृष्टि और निरंतर प्रयोगशीलता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर आनंद के चित्र प्रकृति, रंग और भावना के बीच एक सूक्ष्म संवाद स्थापित करते हैं।
यह प्रोफेसर आनंद लखटकिया की 21वीं एकल चित्र प्रदर्शनी है। इससे पूर्व भी उनके चित्रों की एकल प्रदर्शनियाँ देश के विभिन्न शहरों में आयोजित हो चुकी हैं, जहाँ उन्हें पुरस्कारों सहित व्यापक सराहना मिली है। प्रस्तुत प्रदर्शनी में उनके 25 चित्र प्रदर्शित किए गए हैं, जो विशाल कैनवास पर विभिन्न कालों में निर्मित किए गए हैं।
प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण सी-स्केप्स श्रृंखला है, जिसमें विस्तृत जलराशि और चट्टानों को अत्यंत सजीव रूप में चित्रित किया गया है। इसके अतिरिक्त कुछ यथार्थपरक भूदृश्य चित्र भी दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। कुछ चित्रों में तांत्रिक प्रतीकों का प्रयोग किया गया है, जिनमें सूर्य के प्रकाश और रश्मियों को विशेष रूप से दर्शाया गया है।
कलाकार की नवीनतम श्रृंखला में प्राकृतिक रूपाकारों को अमूर्त शैली में प्रस्तुत किया गया है। इन चित्रों की रंग-योजना चित्ताकर्षक और प्रभावशाली है। प्रोफेसर आनंद का उद्देश्य प्रकृति के चित्रण के माध्यम से समाज का ध्यान प्रकृति की ओर आकर्षित करना है, ताकि मनुष्य संवेदनशीलता के साथ प्रकृति की रक्षा कर सके।
चित्रों में माधुर्य, संवेदनशीलता और नवाचार का सुंदर संगम दिखाई देता है, जो उन्हें समकालीन कलाकारों की प्रमुख श्रेणी में स्थापित करता है। यह मान्यता है कि नवप्रयोगों से ही कला का विकास संभव होता है, और इस प्रदर्शनी में यह दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से झलकता है।
प्रदर्शनी में प्रदर्शित सभी चित्र एक्रिलिक, तैल रंगों तथा अन्य मिश्रित माध्यमों से कैनवास पर निर्मित किए गए हैं। आयोजकों का मानना है कि यह प्रदर्शनी कला के छात्रों के साथ-साथ सामान्य जनमानस पर भी विशिष्ट प्रभाव छोड़ेगी।



Leave a Reply