10 लाख रुपये में राठी हैचरीज़ को हस्तांतरित हुई सीमन डाइल्यूएंट तकनीक, प्रगतिशील कुक्कुट पालक और ग्रामीण लाभार्थी हुए सम्मानित
बरेली@bareillylive:बरेली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई), इज्जतनगर में सोमवार को 48वां स्थापना दिवस समारोह, विराट कुक्कुट मेला एवं कुक्कुट कृषक संगोष्ठी उत्साहपूर्वक आयोजित की गई। मेले में वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों के हस्तांतरण और किसान सशक्तीकरण पर विशेष जोर रहा। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, कुक्कुट उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों, प्रगतिशील किसानों, उद्यमियों और ग्रामीण लाभार्थियों ने प्रतिभाग किया।

समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति डॉ. सुमंत व्यास रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक (पशु उत्पादन एवं प्रजनन) डॉ. एच.के. नरूला उपस्थित रहे। इसके अलावा भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. एस.के. सिंह, ईडब्ल्यू न्यूट्रिशन दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक डॉ. शिरीष निगम तथा जनता फूड्स एंड हैचरीज के प्रबंध निदेशक एवं ब्रॉयलर ब्रीडर एसोसिएशन नॉर्थ के अध्यक्ष मोहित मलिक ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। संस्थान के निदेशक (कार्यवाहक) डॉ. जगबीर सिंह त्यागी ने अतिथियों का स्वागत किया।

कुक्कुट उद्यमियों और वरिष्ठ पत्रकार को किया सम्मानित
कार्यक्रम में कुक्कुट पालन और हैचरी व्यवसाय के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रगतिशील उद्यमियों अब्बास रिजवी, सैयद फैज अहमद चिश्ती एवं वशिष्ठ राव को सम्मानित किया गया। वहीं, वरिष्ठ पत्रकार शंकर दास को पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया।
अनुसूचित जाति उपयोजना एवं जनजातीय उपयोजना के तहत स्वरोजगार, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने वाले लाभार्थियों को भी सम्मानित किया गया। कुक्कुट पालन, बकरी पालन, सुअर पालन, सिलाई और सौर ऊर्जा जैसी गतिविधियों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे लाभार्थियों की उपलब्धियों की सराहना की गई।
10 लाख रुपये में हस्तांतरित हुई तकनीक
स्थापना दिवस समारोह के दौरान संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही संस्थान द्वारा विकसित सीमन डाइल्यूएंट तकनीक को राठी हैचरीज़ को 10 लाख रुपये में हस्तांतरित किया गया। इस पहल को वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावसायिक उपयोग तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
इस अवसर पर मशरूम उत्पादन से संबंधित सामग्री, हिन्दी स्मारिका-2026 तथा जैव प्रौद्योगिकी आधारित आधुनिक कुक्कुट उत्पादन पर प्रकाशित पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
किसानों तक पहुंचे वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ
मुख्य अतिथि डॉ. सुमंत व्यास और अन्य अतिथियों ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी है, जब विकसित तकनीकें किसानों और पशुपालकों तक पहुंचें। उन्होंने कुक्कुट पालन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. संदीप सरन ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, किसानों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।





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