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कुलदीप-चहल जैसे कलाई के स्पिनर अब अधिक प्रासंगिकः मैथ्यू हैडेन

‘‘कुलदीप का मजबूत पक्ष यह नहीं है कि वह गेंद को कितना अधिक स्पिन करा सकता है बल्कि यह है कि उसकी गेंद शेन वार्न की गेंदों की तरह बल्लेबाज तक पहुंचती हैं।’’

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज मैथ्यू हेडन का मानना है कि ‘शेन वॉर्न की तरह के ड्रिफ्ट’ के कारण कुलदीप यादव का सामना करना युजवेंद्र चहल की तुलना में अधिक मुश्किल है। अपने समय के धुरंधर बल्लेबाज ने साथ ही कहा कि इन दोनों भारतीय गेंदबाजों की तरह कलाई के स्पिनर अधिक प्रासंगिक बन रहे हैं क्योंकि अंगुली के स्पिनरों में ‘साहस’ की कमी है। कुलदीप और चहल ने छोटे प्रारूप (टी-20) में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों को परेशान किया है।

हेडन ने कहा, ‘‘लेग स्पिनर आपको विकल्प और विविधता देते हैं। विशेष तौर पर अगर आप कुलदीप को देखें तो उसका मजबूत पक्ष यह नहीं है कि वह गेंद को कितना अधिक स्पिन करा सकता है बल्कि यह है कि उसकी गेंद शेन वार्न की गेंदों की तरह बल्लेबाज तक पहुंचती हैं।’’ हालांकि हेडन का मानना है कि चहल का सामना किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘चहल अलग तरह का गेंदबाज है। वह स्टंप पर गेंदबाजी करता है। वह सपाट और सीधी गेंद फेंकता है। उसे ड्रिफ्ट नहीं मिलता। अगर मैं बल्लेबाज होता तो चहल का सामना करने को प्राथमिकता देता क्योंकि उसे ड्रिफ्ट नहीं मिलता है।’’

ऑफ स्पिनर भूल गए हैं गति में विविधता लाने की कला

ऑस्ट्रेलिया के लिए 8000 से अधिक टेस्ट और 6000 से अधिक वनडे रन बनाने वाले हेडन ने अंगुली के स्पिनरों के सीमित ओवरों के प्रारूप में अधिक सफल नहीं होने के संदर्भ में कहा, ‘‘ऑफ स्पिनरों ने बल्लेबाजों को रोकने की कला सीख ली थी जिसके कारण वे निश्चित समय तक हावी रहे लेकिन अब खिलाड़ी ऑफ स्पिनरों की सपाट गेंदों के आदी हो गए हैं। ऑफ स्पिनर गति में विविधता लाने की कला भूल गए हैं।’’

पूर्व आस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज ने इसके लिए नागपुर में खेले गए सीरीज के दूसरे एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में नाथन लियोन का उदाहरण दिया और इस आफ स्पिनर के दोनों स्पैल की तुलना की। उन्होंने कहा, ‘‘उसके (नाथन कसे) दूसरे स्पैल के दौरान गति 80 से 82 किमी प्रति घंटा के आसपास थी जो पहले स्पैल में 90 से 92 किमी प्रति घंटा थी। इसमें स्पष्ट तौर पर 10 किमी प्रतिघंटा की कमी थी। इस कारण अचानक उसे खेलना मुश्किल हो गया।’’

हेडन को इसमें कोई संदेह नहीं कि गेंदबाजों को अगर सफल होना है तो उन्हें सीमित ओवरों के क्रिकेट में इस तरह का साहस दिखाना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘उनके साथ साहस का मुद्दा होता है जब वे रन नहीं देना चाहते। टेस्ट मैचों में वे रन रोकने की जगह विकेट लेने वाले बन जाते हैं, यही अंतर है।’’

हेडन ने इस बात पर खुशी जताई कि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज केदार जाधव को अलग लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी करने के लिए मजबूर करने में सफल रहे। इस कामचलाऊ स्पिनर के खिलाफ रांची में आरोन फिंच जबकि मोहाली में उस्मान ख्वाजा और पीटर हैंड्सकॉम्ब ने बड़े शॉट खेले। हेडन ने कहा,‘‘उसने (फिंच) जाधव को अलग लेंग्थ पर गेंदबाजी करने के लिए बाध्य किया। जाधव जैसा गेंदबाज तभी सफल है जब वह स्टंप पर गेंदबाजी करे।’’

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