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चंद्रशेखर आजाद जैसा पराक्रमी मिलना मुश्किल, वेबिनार में वक्ताओं ने रखे विचार

बरेली। प्रखर वक्ता और कवि इन्द्र देव त्रिवेदी ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद जैसा पराक्रमी आज तक पैदा नहीं हुआ। उनकी निष्ठा, पराक्रम और देश प्रेम की भावना से युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए।

इन्द्र देव त्रिवेदी मानव सेवा क्लब के तत्वावधान में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की 114वीं जयंती पर एक वेबिनार में विचार व्यक्त कर रहे थे। शिक्षाविद् प्रो.एनएल शर्मा ने कहा कि इतिहास गवाह है कि एक पीढ़ी कष्ट सहती है और अगली पीढ़ी उसका सुख भोगती है। एक पीढ़ी पेड़ लगाती है और दूसरी पीढ़ी उसके फल खाती है। आजादी के लिए जान देने वाली पीढ़ी में एक विशिष्ट नाम है चंद्रशेखर आजाद का। वह 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भावरा नामक स्थान पर सीताराम तिवारी एवम जगरानी देवी  के घर पैदा हुए। बचपन से ही राष्ट्र प्रेम उनके जीवन का उद्देश्य रहा। लोकमान्य तिलक का यह वाक्य उनकी प्रेरणा का स्रोत्र था ‘सुराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा।’जलियांवाला कांड ने चंद्रशेखर आजाद के जीवन की दिशा बदल दी और उन्होंने संगठित होकर अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्षरत रहने ‌का निर्णय लिया। काकोरी कांड और सांडर्स की हत्या की घटनाओं के बाद उन्होंने संघर्ष तेज करने का निश्चय किया। वह युवाओं के लिए आदर्श हैं। उनका पावन चरित्र, शुद्ध आचरण, खरापन,जातिवाद से दूर रहने ‌का भाव, कुशल रणनीति और राष्ट्र निष्ठा युगों तक देश की युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करेगा।   

गोष्ठी में उपजा के प्रदेश उपाध्यक्ष निर्भय सक्सेना ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का कहना था कि अंग्रेज उन्हें कभी जिंदा नहीं पकड़ सकते। इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में मुखबिरी के चलते 27 फरवरी 1931 को वह अंग्रेज पुलिस से घिर गए तो खुद को गोली मार ली।

गोष्ठी का संचालन क्लब के अध्यक्ष सुरेन्द्र बीनू सिन्हा नेकिया। गोष्ठी में महासचिव अभय सिंह भटनागर और डॉ. रीता शर्मा भी उपस्थित रहे।

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