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शारदीय नवरात्रि 17अक्टूबर से, ऐसे करें घटस्थापना जानिये- शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि 17अक्टूबर से, ऐसे करें घटस्थापना जानिये- शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि 2020 : नवरात्रि का पर्व देवी शक्ति मां दुर्गा की उपासना का है। नवरात्रि में माँ दुर्गा के भक्त उनके नौ रूपों की बड़े विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र के समय घरों में कलश स्थापित कर दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू किया जाता है। शारदीय नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनायी जाती है। इस बार शारदीय नवरात्रि 17अक्टूबर शनिवार को हैं।

शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि में ही भगवान श्रीराम ने देवी शक्ति की आराधना कर दुष्ट राक्षस रावण का वध किया था और समाज को यह संदेश दिया था कि बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होती है।

माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का

प्रतिपदा- माँ शैलपुत्री पूजा – यह देवी दुर्गा के नौ रूपों में से प्रथम रूप है। मां शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं और इनकी पूजा से चंद्रमा से संबंधित दोष समाप्त हो जाते हैं।

द्वितीया – माँ ब्रह्मचारिणी पूजा – ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार देवी ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

तृतीया – माँ चंद्रघंटा पूजा – देवी चंद्रघण्टा शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से शुक्र ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

चतुर्थी – माँ कूष्मांडा पूजा – माँ कूष्माण्डा सूर्य का मार्गदर्शन करती हैं अतः इनकी पूजा से सूर्य के कुप्रभावों से बचा जा सकता है।

पंचमी- माँ स्कंदमाता पूजा – देवी स्कंदमाता बुध ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से बुध ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

● षष्टी- माँ कात्यायनी पूजा – देवी कात्यायनी बृहस्पति ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से बृहस्पति के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

● सप्तमी – माँ कालरात्रि पूजा – देवी कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से शनि के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

● अष्टमी- माँ महागौरी पूजा – देवी महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से राहु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

● नवमी – माँ सिद्धिदात्री पूजा – देवी सिद्धिदात्री केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से केतु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

शरद नवरात्रि २०२०-शरद नवरात्रि की तिथियाँ

प्रतिपदा- माँ शैलपुत्री पूजा घटस्थापना 17अक्टूबर 2020(शनिवार)

घटस्थापना मुहूर्त :06:23:22 से 10:11:54 तकअवधि :3 घंटे 48 मिनट

द्वितीया- ब्रह्मचारिणी पूजा 18अक्टूबर 2020(रविवार)

तृतीया-माँ चंद्रघंटा पूजा 19अक्टूबर 2020(सोमवार)

चतुर्थी-माँ कुष्मांडा पूजा 20अक्टूबर 2020(मंगलवार)

पंचमी-माँ स्कंदमाता पूजा 21अक्टूबर 2020(बुधवार)

षष्ठी-माँ कात्यायनी पूजा 22अक्टूबर 2020(गुरुवार)

सप्तमी-माँ कालरात्रि पूजा 23अक्टूबर 2020(शुक्रवार)

अष्टमी-माँ महागौरीदुर्गा महाअष्टमी पूजा 24अक्टूबर 2020(शनिवार)

नवमी-माँ सिद्धिदात्री नवरात्रि पारणा विजय दशमी 25 अक्टूबर 2020(रविवार)

दुर्गा विसर्जन26अक्टूबर 2020(सोमवार)

घटस्थापना के नियम

● दिन के एक तिहाई हिस्से से पहले घटस्थापना की प्रक्रिया संपन्न कर लेनी चाहिए।
● इसके अलावा कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त को सबसे उत्तम माना गया है।
● घटस्थापना के लिए शुभ नक्षत्र इस प्रकार हैं: पुष्या, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़, उत्तराभाद्रपद, हस्ता, रेवती, रोहिणी, अश्विनी, मूल, श्रवण, धनिष्ठा और पुनर्वसु।

घटस्थापना के लिए आवश्यक सामग्री
● सप्त धान्य (7 तरह के अनाज)
● मिट्टी का एक बर्तन जिसका मुँह चौड़ा हो
● पवित्र स्थान से लायी गयी मिट्टी
● कलश, गंगाजल (उपलब्ध न हो तो सादा जल)
● पत्ते (आम या अशोक के)
● सुपारी
● जटा वाला नारियल
● अक्षत (साबुत चावल)
● लाल वस्त्र
● पुष्प (फ़ूल)

घटस्थापना विधि
● सर्वप्रथम मिट्टी के बर्तन में रख कर सप्त धान्य को उसमे रखें।
● अब एक कलश में जल भरें और उसके ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बाँधकर उसे उस मिट्टी के पात्र पर रखें।
● अब कलश के ऊपर अशोक अथवा आम के पत्ते रखें।
● अब नारियल में कलावा लपेट लें।
● इसके उपरान्त नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर और पल्लव के बीच में रखें।
● घटस्थापना पूर्ण होने के बाद देवी का आह्वान किया जाता है।

पूजा संकल्प मंत्र
ॐ विष्णुः विष्णुः विष्णुः, अद्य ब्राह्मणो वयसः परार्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे, अमुकनामसम्वत्सरे
आश्विनशुक्लप्रतिपदे अमुकवासरे प्रारभमाणे नवरात्रपर्वणि एतासु नवतिथिषु
अखिलपापक्षयपूर्वक-श्रुति-स्मृत्युक्त-पुण्यसमवेत-सर्वसुखोपलब्धये संयमादिनियमान् दृढ़ं पालयन् अमुकगोत्रः
अमुकनामाहं भगवत्याः दुर्गायाः प्रसादाय व्रतं विधास्ये।

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