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सुपरटेक एमेरल्ड प्रोजेक्ट : योगी ने दिए दोषी अफसरों पर कठोरतम कार्रवाई के निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा की रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक एमेरल्ड (Supertech Emerald) द्वारा अवैध रूप से दो 40-मंजिला ट्विन टावर बनाए जाने के मामले में शासन स्तर से विशेष समिति गठित कर प्रकरण की गहराई से जांच करने और हर दोषी अधिकारी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बुधवार को यहां बताया कि मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में कहा, “नोएडा में सुपरटेक एमेरल्ड द्वारा अवैध रूप से ट्विन टावर बनाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।” सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के नोएडा में नियमों का उल्लंघन कर एमेरल्ड कोर्ट परियोजना में बनाए गए सुपरटेक के 40-मंजिला दो निर्माणाधीन टावरों को मंगलवार को तीन महीने के भीतर गिराने का निर्देश दिया था और कहा था कि मामले में जिले के अधिकारियों की ‘‘मिलीभगत” साफ नजर आती है।

आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने मामले की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने कहा, “शासन स्तर से विशेष जांच समिति गठित कर इस प्रकरण की गहन जांच कराई जानी चाहिए। एक-एक दोषी अधिकारी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकतानुसार आपराधिक मामला भी दर्ज किया जाए। इस संबंध में तत्काल कार्रवाई की जाए।”

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नोएडा के सेक्टर 93 में सुपरटेक एमेरल्ड कोर्ट हाउसिंग परियोजना के तहत नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए ट्विन टावर को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने ट्विन टावर को तीन महीने के अंदर जमींदोज करने का आदेश देते हुए कहा कि जिला स्तरीय अधिकारियों की साठगांठ से किए गए इस इमारत के निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी ताकि नियम कायदों का अनुपालन सुनिश्चित हो सके।

नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत ने इसके अधिकारियों की एमेरल्ड कोर्ट परियोजना में सुपरटेक के साथ मिलीभगत की कई घटनाओं को रेखांकित किया। अदालत ने कहा, “मामले से योजना प्राधिकारण और डेवलेपर के बीच कानून के प्रावधानों के उल्लंघन के सिलसिले में कपटपूर्ण मिलीभगत का खुलासा हुआ है।” शीर्ष अदालत ने यह निर्देश भी दिया था कि घर खरीददारों का समूचा धन बुकिंग की तारीख से 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाया जाए और दोनों टावर की वजह से एमेराल्ड कोर्ट की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को हुई परेशानी के लिए दो करोड़ रुपये दिए जाएं।

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