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शुक्ल प्रतिपदा अर्थात हिंदू नव वर्ष

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हिंदू नव वर्ष का पहला दिन माना जाता है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी प्रारंभ हो जाती है। वैसे तो पूरे विश्व में अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नववर्ष 1 जनवरी से प्रारंभ होता है किंतु वैदिक हिंदू परंपरा और सनातन काल गणना में चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर नव वर्ष का प्रारंभ होता है।

 पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने समस्त सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी जो आज से एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49हजार 110 वर्ष पूर्व प्रारंभ की गई थी । इसी तिथि पर महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, माह  और वर्ष की गणना करते हुए हिंदू पंचांग की रचना की थी। इसी तिथि से वर्ष भर के पर्व उत्सव और अनुष्ठानों के शुभ मुहूर्त निश्चित होते हैं।

इसी तिथि पर भगवान राम ने वानर राज बाली का वध करके उसके राज्य से अन्याय और अत्याचार से लोगों को मुक्ति दिलाई थी। इसी तिथि से ही नव संवत्सर का प्रारंभ होता है। महाराजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत का प्रारंभ करा गया था और इसी दिन उन्होंने अपने राज्य की स्थापना भी की थी। इसी दिन भगवान झूलेलाल की जयंती भी मनाई जाती है और इसी दिन चारों युगों के सबसे पहले युग सतयुग के प्रारंभ की तिथि भी यही है। महर्षि दयानंद द्वारा आर्य समाज की स्थापना भी इसी दिन की गई और भगवान श्री राम के राज्याभिषेक का दिवस भी यही है। धर्मराज युधिष्ठिर का राजतिलक इसी दिन किया गया और सिखों के द्वितीय गुरु श्री अंगद देव जी का जन्मदिवस भी इसी दिन का है।

पूरे विश्व को और विशेष रूप से भारत वर्ष को देश प्रेम एकता आपसी भाईचारे कर्मठता समानता और सबसे बढ़कर मनुष्य जाति की सेवा को ही अपना ध्येय और संकल्प समझने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक परम श्रद्धेय डॉ केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म दिवस भी यही है।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अर्थात नववर्ष के महत्व को समझते हुए हमारा यह कर्तव्य बनता है कि हम लोग पूर्ण उत्साह, श्रद्धा भाव और उल्लास के साथ इस नव वर्ष को मनाएं और भारतीय संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने और उसके प्रचार-प्रसार हेतु तन मन और धन से इसमें प्रयासरत हों। इस दिन अपने घरों पर दीप जलाकर, ध्वज  लगाकर, मिष्ठान वितरण करके एवं आपस में एक दूसरे को शुभकामनाएं संदेश देकर इस नव वर्ष को मनाएं और प्रण करें कि हम आपस में, प्रेम प्यार, एक दूसरे के सम्मान आपसी भाईचारे और राष्ट्रभक्ति को दिल में रखते हुए देश और समाज की उन्नति में अग्रसर रहेंगे।

ऋषि कुमार शर्मा
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