The Voice of Bareilly since 2010

बाबा श्री विभूति नाथ जी का 30 दिवसीय श्रावण मास महारुद्राभिषेक महोत्सव प्रारंभ

Bareillylive : श्रावण मास का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है, विशेषकर भगवान शिव की आराधना के लिए यह महीना अत्यंत पावन और पुण्यदायी माना जाता है। इसी पावन अवसर पर शाहाबाद स्थित बाबा श्री विभूति नाथ जी महाराज के मंदिर में, श्री राधा कृपा संकीर्तन सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान एवं कथा व्यास पंडित गोपाल कृष्ण मिश्रा के सानिध्य में, प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 30 दिवसीय श्रावण मास महारुद्राभिषेक महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा और संस्कारों का भी अद्भुत संगम है।

महोत्सव का शुभारंभ और आयोजन की विशेषताएँ

पंचम श्रावण मास महारुद्राभिषेक महोत्सव का प्रारंभ भगवान शिव के महारुद्राभिषेक के साथ हुआ। वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न होने वाले इस आयोजन में प्रतिदिन अलग-अलग यजमानों द्वारा भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराया जाता है। वैदिक आचार्य निलेश मिश्रा के नेतृत्व में संपूर्ण अनुष्ठान सम्पन्न होता है, जिसमें पंडित गोपाल कृष्ण महाराज की मुख्य भूमिका रहती है। वे न केवल विधि-विधान का पालन कराते हैं, बल्कि भक्तों को शिवमहिमा, श्रावण मास के महत्व और रुद्राभिषेक के लाभ के विषय में भी विस्तार से बताते हैं।

प्रतिदिन का शिवार्चन और अद्भुत श्रृंगार

महोत्सव के दौरान प्रतिदिन प्रातःकालीन बेला में महादेव का शिवार्चन किया जाता है। यजमानों द्वारा बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसमें फूलों, वस्त्रों, आभूषणों और विविध सुगंधित द्रव्यों का प्रयोग होता है। बाबा का यह अद्भुत श्रृंगार भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है। जब भक्तजन बाबा के दिव्य रूप का दर्शन करते हैं, तो उनका हृदय भक्ति भाव से भर उठता है और वे भाव-विभोर हो जाते हैं। श्रृंगार के पश्चात महादेव की आरती का आयोजन होता है, जिसमें डमरू, श्रृंगी, घंटी आदि वाद्ययंत्रों का नाद वातावरण को शिवमय बना देता है। आरती के समय मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है और हर ओर ‘हर हर महादेव’ का जयघोष गूंज उठता है।

रुद्राभिषेक का महत्व और भक्तों की सहभागिता

रुद्राभिषेक को भगवान शिव की प्रसन्नता का सर्वोत्तम उपाय माना गया है। श्रावण मास में इसका विशेष महत्व है, क्योंकि इस पूरे मास में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घृत, शहद, शक्कर, बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि अर्पित करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। बाबा श्री विभूति नाथ जी महाराज के इस महोत्सव में दूर-दूर से श्रद्धालु भाग लेते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार यजमान बनकर रुद्राभिषेक करवाते हैं। इसमें सभी वर्गों के लोग, युवा, वृद्ध, महिलाएँ और बच्चे, पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भाग लेते हैं।

भक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता का संदेश

महोत्सव के दौरान श्री राधा कृपा संकीर्तन सेवा ट्रस्ट के सभी सदस्य तन-मन-धन से सेवा में जुटे रहते हैं। मंदिर परिसर की सफाई, भक्तों के लिए जल, प्रसाद, भंडारे की व्यवस्था, श्रृंगार सामग्री की उपलब्धता, सभी कार्यों को ट्रस्ट के सदस्य अत्यंत श्रद्धा और समर्पण भाव से करते हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि सामाजिक सेवा और समरसता का भी उदाहरण है। यहाँ हर वर्ग, जाति, समुदाय के लोग एक साथ बैठकर पूजा-अर्चना और भंडारे का प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिससे सामाजिक एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।

विश्राम दिवस और प्रदोष पूजन

श्रावण मास के अंतिम दिनों में विशेष प्रदोष पूजन का आयोजन किया जाता है, जिसमें भक्तजन बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। इस दिन विशेष रूप से शिवलिंग का अभिषेक, श्रृंगार, आरती एवं भंडारे का आयोजन होता है। भंडारे में हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसी दिन महोत्सव का समापन होता है, जिसमें सभी भक्तजन, यजमान, ट्रस्ट के सदस्य और मंदिर कमेटी के लोग मिलकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अगले वर्ष पुनः इस महोत्सव में सम्मिलित होने का संकल्प लेते हैं।

ट्रस्ट एवं मंदिर कमेटी का अभिनंदन

इस भव्य आयोजन की सफलता के पीछे श्री राधा कृपा संकीर्तन सेवा ट्रस्ट और बाबा श्री विभूति नाथ मंदिर कमेटी का विशेष योगदान है। ट्रस्ट के सभी सदस्य, आयोजक, आचार्य, पंडित और स्वयंसेवक अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी श्रद्धा, समर्पण और निष्ठा से करते हैं। ट्रस्ट और कमेटी सभी भक्तों, यजमानों, सहयोगियों और श्रद्धालुओं का अभिनंदन करती है, जिन्होंने इस महोत्सव को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।

error: Content is protected !!