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हरि मंदिर के 65वें वार्षिक महोत्सव का शुभारंभ, कलश यात्रा से श्रीमद्भागवत कथा शुरू

Bareillylive : श्री हरि मंदिर, मॉडल टाउन, बरेली में आयोजित 65वें वार्षिक विराट भक्ति महोत्सव का शुभारंभ बड़े ही विधि-विधान और धार्मिक उल्लास के साथ हुआ। इस अवसर पर मंदिर प्रांगण से निकली दिव्य मांगलिक कलश यात्रा ने पूरे नगर का वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर कर दिया।


108 महिलाओं ने सजाए मंगल कलश

कलश शोभा यात्रा की सबसे विशेष झलक यह रही कि 108 महिलाओं ने पारंपरिक पीले वस्त्र पहनकर सिर पर कलश धारण किए और वैदिक मंत्रोच्चारण व मंगल गीतों के बीच अग्रिम पंक्ति में चलते हुए पूरे नगर में भक्ति का संदेश फैलाया। उनके साथ श्रद्धालुओं ने हरि नाम संकीर्तन गाते हुए यात्रा को जीवंत बना दिया।

शोभायात्रा में श्री हरि मंदिर संकीर्तन मंडल के भक्तों ने संगीतमय संकीर्तन प्रस्तुत किया। जगह-जगह नगरवासियों ने फूलों की वर्षा करके यात्रियों का स्वागत किया। शहर की गलियां “जय श्रीराम”, “हरे कृष्ण-हरे राम” और “राधे-राधे” जैसे उद्घोष से गूंज उठीं।


दिव्य रथ और झांकियों ने आकर्षित किया

शोभा यात्रा में बैंड-बाजों और भव्य झांकियों ने सभी का मन मोह लिया। भगवान श्री राधा-कृष्ण की विशेष झांकी, सुसज्जित रथों और रंग-बिरंगी सजावट ने माहौल को और भी आभामयी बना दिया। यात्रा में विशेष आकर्षण रहे पठानकोट से पधारे पूज्य भागवत भूषण श्री अतुल कृष्ण शास्त्री जी महाराज, जो दिव्य रथ पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को आशिर्वाद देते चल रहे थे। उनके दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।


कथा पूजन और यजमानों की सेवा

कलश शोभा यात्रा के पश्चात, मंदिर प्रांगण में आचार्य श्री के सानिध्य में विधिवत श्रीमद्भागवत महापुराण का पूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर कथा के यजमान सुप्रिया-अंकित अग्रवाल एवं श्रुति-अनुज अग्रवाल (शीशगढ़ वाले) रहे जिन्होंने पूरे परिवार सहित भावपूर्वक पूजन कर कथा का प्रारंभ कराया।


भागवत कथा का महत्व – आचार्य श्री का प्रवचन

पूज्य श्री अतुल कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए भक्तों को कथा श्रवण का महत्व बताया। उन्होंने कहा –
भागवत कथा सुनने मात्र से वर्तमान और भविष्य दोनों में शांति प्राप्त होती है। यह कलयुग के लिए सबसे सरल, श्रेष्ठ और मानव कल्याणकारी साधन है। सतयुग, त्रेता और द्वापर में जहां कठिन तप-त्याग के पश्चात ही मुक्ति संभव थी, वहीं कलयुग में भगवान का नाम स्मरण करने से मुक्ति के द्वार खुल जाते हैं। प्रातः उठते ही मंगलाचरण में भगवान का नाम लेने से जीवन में सुख-शांति और आशीर्वाद स्वतः प्राप्त होता है।”

उन्होंने आगे कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मात्र धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन जीने की गूढ़ कला सिखाती है। यह मानव को आत्मिक शांति, भय से मुक्ति तथा ईश्वर से एकाकार होने का मार्ग दिखाती है।


24 अगस्त तक होगा कथा का आयोजन

कार्यक्रम के अनुसार श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन 18 अगस्त से 24 अगस्त तक प्रतिदिन शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक मंदिर प्रांगण में होगा। आयोजकों ने समस्त नगर वासियों को परिवार सहित कथा श्रवण का आमंत्रण दिया है।


उपस्थित गणमान्य और समिति का सहयोग

आज के कार्यक्रम में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सुशील अरोड़ा, सचिव रवि छाबड़ा, अश्विनी ओबेरॉय, संजय आनंद, गोविंद तनेजा, अनिल चढ़ा, हरीश लुनियाल, दीपक साहनी, राजेश अरोड़ा, संजीव अरोड़ा, विनोद भाटिया, सचिन सेठी, अतुल कपूर आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
महिला सेवा समिति की सक्रिय भागीदारी उल्लेखनीय रही। समिति की अध्यक्ष रेनू छाबड़ा के साथ कंचन अरोड़ा, नीलम साहनी, नेहा आनंद, नीलम लुनियाल, ममता ओबेरॉय, सीमा तनेजा, प्रवेश कोचर, निशा लखानी, अलका छाबड़ा, विमल सोंधी, मीरा कथूरिया आदि ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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