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साहित्य परिषद की गोष्ठी में सुरेश बाबु मिश्रा को निर्मल वर्मा पुरस्कार मिलने पर हुआ सम्मान

Bareillylive : अखिल भारतीय साहित्य परिषद ब्रज प्रांत बरेली के तत्वावधान में “वर्तमान परिवेश में हिंदी साहित्य का बदलता स्वरूप” विषयक एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसी अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान किए गए अखिल भारतीय निर्मल वर्मा संस्मरण सम्मान से सम्मानित प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश बाबू मिश्रा का पदाधिकारियों ने शाल ओढ़ाकर और माल्यार्पण कर हार्दिक अभिनंदन किया।

कार्यक्रम शील ग्रुप के सिटी ऑफिस पर आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रो. के ए वार्ष्णेय ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ उमेश चन्द्र गुप्ता द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने कार्यक्रम का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वातावरण स्थापित किया।

प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश बाबू मिश्रा ने हिंदी साहित्य के बदलते स्वरूप पर अपने अनुभव और विश्लेषण प्रस्तुत किए। इसके अलावा प्रांतीय महामंत्री डॉ. शशिबाला राठी, डॉ. एस. पी. मौर्य, और प्रोफेसर विनीता सिंह ने भी हिंदी साहित्य के वर्तमान परिवेश में हो रहे बदलावों पर गहन विचार साझा किए।

कार्यक्रम में विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य शिव ओम शर्मा, अनुराग उपाध्याय, प्रवीण शर्मा, रितेश साहनी, गंगाराम पाल, प्रमोद मिश्रा, निर्भय सक्सेना, सुरेंद्र बीनू सिन्हा, अखिलेश गुप्ता सहित अन्य साहित्य प्रेमियों ने भी सुरक्षा मिश्रा को उनके महत्वपूर्ण सम्मान के लिए बधाई दी। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह सम्मान न केवल सुरेश बाबू मिश्रा के लिए बल्कि पूरे साहित्यिक समुदाय के लिए गर्व की बात है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. बृजेश कुमार शर्मा ने किया, जिन्होंने सभी प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया। इस सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजन ने हिंदी साहित्य की वर्तमान दिशा और उसके विकास की संभावनाओं को उजागर किया।

साहित्य परिषद ब्रज प्रांत के इस आयोजन ने हिंदी साहित्य के बदलते स्वरूप पर गहन चर्चा करते हुए यह भी दिखाया कि किस प्रकार एतिहासिक और समकालीन संदर्भ में साहित्य की भूमिका समाज को प्रेरित कर सकती है। सुरेश बाबू मिश्रा के निर्मल वर्मा पुरस्कार से सम्मानित होने पर यह आयोजन और भी विशेष महत्व का हो गया, जो साहित्यिक क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता देने का भी प्रतीक है।

यह कार्यक्रम बरेली के साहित्यिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ, जिसने सभी साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों को प्रेरित किया। इस मौके पर हिंदी साहित्य के उत्थान और विकास के लिए नवोन्मेषी विचार आमंत्रित किए गए, जिससे साहित्य का व्यापक प्रसार हो सके।

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