Bareillylive : विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश, आत्मनिर्भर भारत – आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश, शताब्दी संकल्प @2047 एवं समृद्धि का शताब्दी वर्ष विषयक संवाद कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार को भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) स्थित सभागार में किया गया। कार्यक्रम में प्रबुद्धजनों, प्रगतिशील कृषकों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि छात्रों और एफपीओ प्रतिनिधियों की उपस्थिति में भविष्य के विजन डॉक्यूमेंट 2047 पर विचार-विमर्श कर मूल्यवान सुझाव संकलित किए गए।
इस अवसर पर पूर्व आईपीएस प्रशांत कुमार, प्रमुख सचिव सहकारिता विभाग व नोडल अधिकारी सौरभ बाबू, पूर्व आईएएस रामाशंकर मौर्य, आईवीआरआई के पूर्व निदेशक अशोक कुमार वर्मा, रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय के पूर्व परीक्षा नियंत्रक अशोक कुमार अरविन्द तथा आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
संवाद के दौरान प्रगतिशील किसान अनिल साहनी ने ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि मात्र 100 पौधों से शुरू कर आज 20 एकड़ में इसकी वाणिज्यिक खेती कर रहे हैं।
पूर्व आईपीएस प्रशांत कुमार ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित देशों की श्रेणी में लाना है और यह लक्ष्य उत्तर प्रदेश के योगदान के बिना अधूरा रहेगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में सर्वांगीण विकास हुआ है। 2017 में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में प्रदेश 14वें स्थान पर था, आज दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। किसानों, व्यापारियों और महिलाओं के लिए नवाचार, बेहतर कानून व्यवस्था और सुरक्षित माहौल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति जिस क्षेत्र में कार्यरत है, वह नवाचार अपनाकर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान दें। सर्वश्रेष्ठ सुझावों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।
प्रमुख सचिव सहकारिता विभाग सौरभ बाबू ने कहा कि कृषि विकास दर को गति दिए बिना आर्थिक प्रगति संभव नहीं। पिछले वर्षों में प्रदेश की जीडीपी 25% तक बढ़ी है, निर्यात और प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि गेहूं, धान, गन्ना, मिलेट्स, दुग्ध और एथेनॉल उत्पादन में निरंतर प्रगति हुई है। भविष्य की नीति ऐसी होगी जो उत्पादन के साथ उत्पादकता को भी बढ़ाए।
आईवीआरआई के पूर्व निदेशक अशोक कुमार वर्मा ने सुझाव दिया कि पशुओं के लिए बीमा कवर सुविधा, नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन बढ़ोतरी और पशु उत्पादों के लिए व्यापक विपणन व्यवस्था विकसित की जाए। ग्राम व ब्लॉक स्तर पर प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएं और किसानों को प्रशिक्षित करने के कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाएं।
आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने संस्थान द्वारा पशुओं की बीमारियों के लिए वैक्सीन पर किए गए नवाचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अब तक 50 से अधिक वैक्सीन विकसित की गई हैं, जिनमें लंपी स्किन डिजीज की वैक्सीन भी शामिल है। उन्होंने कहा कि 2047 तक कई बीमारियों के नियंत्रण हेतु नई वैक्सीन विकसित करना संस्थान का विजन है।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि प्रदेश की 25 करोड़ जनता में से प्रत्येक परिवार से एक-एक सुझाव आना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश की बढ़ती कृषि दर, दलहन-तिलहन उत्पादन में वृद्धि, डीबीटी के माध्यम से किसानों को पहुंचाई गई मदद और कृषि योजनाओं की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती की बजाय व्यावसायिक खेती अपनाने का आह्वान किया।
संवाद के दौरान किसानों ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इनमें गांवों में संसाधनों की उपलब्धता, बच्चों के पलायन रोकने की योजनाएं, गन्ना मूल्य भुगतान हेतु कड़े कानून, गाय के गोबर व गौमूत्र के उपयोग को बढ़ावा, कृषि उपकरणों का प्रचार-प्रसार, तथा सही समय पर मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग शामिल थी।
कार्यक्रम में अपर पुलिस महानिदेशक रमित शर्मा, पुलिस महानिरीक्षक अजय कुमार साहनी, मुख्य विकास अधिकारी देवयानी, पुलिस अधीक्षक नगर मानुष पारीक सहित जिले के अधिकारीगण उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि नागरिक अपने सुझाव 5 अक्टूबर तक samarthuttarpradesh.up.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन भेज सकते हैं, जिन्हें आगामी विजन डॉक्यूमेंट 2047 में शामिल किया जाएगा।





