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दलित और गरीब महिला पर छाया भू-माफ़ियाओं का डर, पति दो माह से है लापता

Bareillylive : उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार जहाँ एक ओर आतंकवाद और माफियागिरी को खत्म करने का दावा कर रही है, वहीं ज़मीनी हकीकत कहीं अधिक भयावह दिखाई दे रही है। प्रदेश के गोंडा ज़िले से आया एक ताज़ा मामला सत्ता और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यहाँ एक दलित और गरीब महिला अपने पति की खोज में दर-दर भटक रही है। उसका आरोप है कि भू-माफ़ियाओं के गिरोह ने उसके पति को न केवल धोखे से अपहृत किया बल्कि उनकी ज़िंदगी भी खतरे में डाल दी है।

यह मामला इब्राहिमपुर, बालापुर, थाना नवाबगंज, तहसील तरबगंज का है। पीड़िता दशरया, पत्नी झगरू, गरीब और वृद्ध अनुसूचित जाति की महिला है। उसके मुताबिक, क्षेत्र के प्रभावशाली भू-माफ़िया और बदमाश, जिनका आपराधिक नेटवर्क अंतर्राज्यीय स्तर तक फैला हुआ है, ने पहले उनकी पट्टे पर मिली भूमि को अवैध तरीक़े से अपने नाम बैनामा करवा लिया। महिला का आरोप है कि उसके पति को धमका कर या बहला-फुसलाकर घर से उठा लिया गया और पिछले दो महीने से वे कहीं दिखाई नहीं पड़े। शंका जताई जा रही है कि या तो उनकी हत्या कर दी गई है या फिर उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर बंधक बनाकर रखा गया है।

पीड़िता ने बताया कि इस विवाद से जुड़ा मुकदमा पहले से ही माननीय एसडीएम न्यायालय में “सरकार बनाम झगरू आदि” नाम से विचाराधीन है। इसके बावजूद भू-माफ़ियाओं का दबदबा और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी उसके जीवन पर भारी पड़ रही है। महिला का कहना है कि उसने कई बार पुलिस-प्रशासन को अपनी व्यथा बताई, लेकिन उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया।

गाँव के लोग भी बताते हैं कि उक्त भू-माफ़ियाओं का आतंक इतना बढ़ गया है कि कोई उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की हिम्मत नहीं करता। महिला का कहना है कि उसका परिवार पहले से निर्धनता और सामाजिक उत्पीड़न से जूझ रहा था, अब पति की गुमशुदगी ने उसकी दुनिया ही उजाड़ दी है। वह अकेली अपने हक और इंसाफ़ के लिए संघर्ष कर रही है।

दशरया ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही शासन-प्रशासन उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया और उसके पति के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई, तो वह किसी बड़े आंदोलन या गंभीर कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाएगी। सवाल यह है कि जब प्रदेश सरकार खुद को माफ़ियामुक्त प्रदेश बनाने के दावे करती है, तो फिर गोंडा की इस दलित महिला और उसके परिवार की तलाश-इंसाफ़ की गुहार कौन सुनेगा?

क्या प्रशासन सच में भू-माफ़ियाओं पर अंकुश लगाने में असफल है या फिर यह मामला राजनीतिक और रसूखदार नेटवर्क के दबाव में दबा हुआ है? फिलहाल, इस दलित महिला की आँखों में बस एक ही आस झलकती है—किसी तरह उसके पति सुरक्षित घर लौट आएं।

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