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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर एसआरएमएस में लगा जागरूकता कैंप, हुई कारणों और समाधान पर चर्चा

Bareillylive : विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर बुधवार (10 सितंबर 2025) को एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मानसिक रोग विभाग की ओर से किया गया, जिसमें आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर रोक लगाने और मानसिक रोगों के प्रति समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए नुक्कड़ नाटक से हुई। इस नाटक में नौकरी न मिलने से जूझ रहे एक युवा के तनाव और अवसाद की स्थिति को दर्शाया गया। विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि जीवन बेहद अनमोल है और हर समस्या का समाधान संभव है, बशर्ते व्यक्ति परिवार और समाज से सहयोग पाए। नाटक में यह भी दिखाया गया कि अवसाद से पीड़ित व्यक्ति को पारिवारिक सहयोग, अपनत्व और परामर्श की बेहद ज़रूरत होती है। यदि उसे समय रहते सहयोग नहीं मिलता, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। विद्यार्थियों ने दर्शकों से अपील की कि समस्याओं को छिपाने की बजाय परिवार के साथ साझा करें और मिलकर समाधान खोजें।

इस मौके पर एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर आदित्य मूर्ति ने कहा कि मानसिक रोगों का समय रहते उपचार बेहद ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति आज की पीढ़ी के सामने गंभीर चुनौती बन चुकी है, लेकिन समाज की सोच बदलकर और जागरूकता फैलाकर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। आदित्य मूर्ति ने मानसिक रोगों पर केंद्रित एक पुस्तिका का विमोचन भी किया और कहा कि ऐसी पहल समाज को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व से जोड़ने में कारगर साबित होती है।

प्रोफेसर (डा.) दीपक चरन ने आत्महत्या रोकथाम दिवस का महत्व बताते हुए आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे काम कर रहे कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तनाव, सामाजिक दबाव, अकेलापन और अवसाद जैसे कारणों से आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए परिवार और मित्र मंडली को आगे आने की सलाह दी।

नुक्कड़ नाटक को प्रस्तुत करने वालों में डा. रिया कंसल, डा. आस्था बंसल, डा. अर्चित अवस्थी, डा. शिवानी राना, डा. गरिमा सिंह और डा. आदर्श कुमार शामिल रहे। कार्यक्रम की कोऑर्डिनेटर डा. सुप्रिया डीसिल्वा और डा. मनाली साहू ने आत्महत्या के बढ़ते मामलों में तनाव, अवसाद, दुख और सामाजिक दबाव की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अवसाद के लक्षणों की पहचान और समय रहते इलाज ही रोकथाम की कुंजी है।

इस अवसर पर डा. आयुष गगनेजा, डा. प्रज्ञा, डा. प्रेरणा, डा. पंकिल, डा. आशी, डा. शिखा, डा. रूपाली, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट अर्चना धनखड़ और अजेता कुमारी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शिक्षण स्टाफ मौजूद रहे। पूरा कार्यक्रम इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि जीवन बेहद बहुमूल्य है और इसका हर पल जीने योग्य है। आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं बल्कि उससे भागने का रास्ता है, जबकि समाधान संवाद, सहयोग और उपचार में है।

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