Bareillylive : पॉलिथीन प्रदूषण से निपटने के लिए एक अनोखा और घरेलू समाधान सामने आया है। भारत तिब्बत सहयोग मंच के ब्रज प्रांत अध्यक्ष शैलेंद्र विक्रम ने बरेली स्थित कार्यालय में वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण और पॉलिथीन रीसाइक्लिंग की चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। शैलेंद्र विक्रम ने आम जनता के लिए एक बेहद सरल व प्रभावी उपाय सुझाया, जिसमें प्लास्टिक की खाली बोतलों को पॉलिथीन निस्तारण का ‘हथियार’ बनाने पर जोर दिया गया।
शैलेंद्र विक्रम ने कहा कि घरों में निकलने वाली पतली पॉलिथीन को इधर-उधर फेंकने या जलाने के बजाय खाली प्लास्टिक बोतलों में भरकर कबाड़ी को बेच देना चाहिए। इससे पॉलिथीन को ठोस रूप मिलेगा, नालियां चोक होने से बचेंगी और कचरा बीनने वालों के लिए एकत्रीकरण आसान हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि पॉलिथीन जलाना वायु प्रदूषण को बढ़ावा देता है, जो स्वास्थ्य के लिए घातक है। इस विधि से कचरा व्यवस्थित होकर रीसाइक्लिंग चेन में पहुंचेगा, जिससे शहर प्लास्टिक मुक्त बन सकेंगे। बरेली जैसे शहरों में नालियों में फंसी पॉलिथीन बाढ़ और जलजमाव का कारण बनती है, इसलिए जन-भागीदारी आवश्यक है।
पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने इस व्यावहारिक सुझाव की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इसे जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से पूरे समाज तक पहुंचाया जाएगा। नगर निगम और एनजीओ के सहयोग से कार्यशालाएं आयोजित कर लोगों को प्रेरित किया जाएगा। मुलाकात में भारत तिब्बत सहयोग मंच के युवा विभाग जिलाध्यक्ष अरविंद पाल और मीडिया प्रभारी आशीष बघेल भी उपस्थित रहे। उन्होंने मंच की पर्यावरण पहलों का विवरण साझा किया।यह सुझाव पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में क्रांतिकारी साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हर घर इस अभियान से जुड़ जाए, तो प्लास्टिक कचरा 50 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
मंच ने शहरवासियों से अपील की है कि प्लास्टिक बोतलों को कचरा डिब्बे न बनाएं, बल्कि पॉलिथीन का ‘संग्रहालय’ बनाएं। सरकार की ‘स्वच्छ भारत’ और ‘प्लास्टिक फ्री इंडिया’ योजनाओं से जोड़कर इसे राष्ट्रीय स्तर पर फैलाया जा सकता है। बरेली में जल्द ही जागरूकता रैली का आयोजन प्रस्तावित है। सभी नागरिकों से सहयोग की अपेक्षा है।






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