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साहित्यकार डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा ‘रचनात्मक साहित्यिक अवदान’ सम्मान से अलंकृत

Bareillylive : साहित्यिक संस्था शब्दांगन के तत्वावधान में बिहारीपुर स्थित शब्दांगन सभागार में आयोजित काव्य गोष्ठी में सहारनपुर के साहित्यकार डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा को उनके आजीवन साहित्यिक योगदान के लिए ‘रचनात्मक साहित्यिक अवदान’ सम्मान से नवाजा गया। संस्था के अध्यक्ष डॉ. सुरेश रस्तोगी और महामंत्री इंद्रदेव त्रिवेदी ने उन्हें उत्तरीय, स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, सुनहरी माला एवं पटका भेंट कर सम्मानित किया।

डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा ने सम्मान पर शब्दांगन का आभार जताया और अपनी लोकप्रिय रचनाएं सुनाईं। उनकी यह पंक्ति श्रोताओं को खूब भाई—”डूबती जा रही है जो नदी खुद नाव में।
आज वो अनमोल ले लो अब किसी भाव में।।” काव्य गोष्ठी में अन्य कवियों ने भी समां बांध दिया।

शायर रामकुमार अफरोज ने सामाजिक वास्तविकता पर व्यंग्य किया—”प्यार को अपराध समझेंगे अगर माता-पिता।
बेटियां-बेटे चखेंगे गोलियां सल्फास की।”

कवि राम प्रकाश सिंह ओज के मुक्तक ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया—”नववर्ष में नित्य उदित हो हंसता हुआ दिनमान।
दुख की पीड़ा मिटे सभी की मिटे समस्त व्यवधान।।”

डॉ. अनुज कुमार शर्मा ने बेटी-पिता के प्रेम पर हृदयस्पर्शी गीत सुनाया—”कभी भी रूठ जाती है, कभी मुझको मनाती है।
बहाने से मेरा बचपन मेरी यादों में लाती है।।”

संचालन कर रहे महामंत्री इंद्रदेव त्रिवेदी ने बरेली के कुतुबखाना क्षेत्र की गंदगी-अतिक्रमण पर तीखा गीत प्रस्तुत किया—”वहां पर गंदगी फैली, वहां की है हवा मैली।
जहां देखो वहां बिखरी, कहीं पन्नी कहीं थैली।
गढ़ी-मठिया चले जाना, कुतुबखाना नहीं जाना।।”

कार्यक्रम में विशेष सहयोग डॉ. सुरेश रस्तोगी, विशाल शर्मा, विवेक मिश्रा एवं अलका त्रिवेदी ने दिया। संचालन इंद्रदेव त्रिवेदी ने किया तथा सभी का आभार डॉ. सुरेश रस्तोगी ने व्यक्त किया। यह गोष्ठी साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणादायी रही।

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