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ऊर्जा विज्ञान और डिजिटल डिटॉक्स: मोबाइल की लत से बिगड़ रही युवाओं की ऊर्जा

Bareillylive : आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसकी अति अब एक गंभीर मानसिक और शारीरिक संकट का रूप ले रही है। मोबाइल से निकलने वाली तरंगें और स्क्रीन पर बिताया गया घंटों का समय न केवल हमारी आंखों, बल्कि हमारी आंतरिक ऊर्जा (Energy) को भी खंडित कर रहा है।​

बरेली के जाने-माने लाइफ आर्ट एक्सपर्ट और इनर स्माइल केयर ग्रुप के निदेशक विशेष कुमार ने हाल ही में ऊर्जा विज्ञान (Energy Science) के परिप्रेक्ष्य में इसके दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे स्मार्टफोन का बढ़ता उपयोग बच्चों, युवाओं और महिलाओं के ऊर्जा चक्र को प्रभावित कर रहा है।​

विभिन्न वर्गों पर पड़ते दुष्प्रभाव : ​विशेष कुमार के अनुसार, मोबाइल का असर हर आयु वर्ग पर अलग और गहरा है:​बच्चे: बच्चों में रचनात्मकता खत्म हो रही है। उनकी कोमल ऊर्जा कोशिकाएं मोबाइल रेडिएशन के कारण संकुचित हो रही हैं, जिससे उनमें एकाग्रता की कमी और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है।​

युवा: युवाओं में ‘नींद की कमी’ और ‘तुलना की भावना’ (Social Media Anxiety) उनके आभा-मंडल (Aura) को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही है, जिससे वे मानसिक अवसाद की ओर बढ़ रहे हैं। ​

महिलाएं: घर और बाहर की जिम्मेदारियों के बीच मोबाइल का अत्यधिक उपयोग महिलाओं के हार्मोनल संतुलन और मानसिक शांति में बाधक बन रहा है।​

डिजिटल डिटॉक्स क्यों है जरूरी? ​विशेष कुमार जो की पिछले 25 वर्षों से ऊर्जा विज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत हैं, कहते हैं— “जैसे शरीर की शुद्धि के लिए उपवास जरूरी है, वैसे ही मस्तिष्क और ऊर्जा की शुद्धि के लिए डिजिटल डिटॉक्स अनिवार्य है।”​

उनके अनुसार, जब हम लगातार स्क्रीन देखते हैं, तो हमारी ‘प्राण ऊर्जा’ का क्षरण होता है। डिजिटल डिटॉक्स से मस्तिष्क को आराम मिलता है और हमारी ऊर्जा पुनः केंद्रित होने लगती है।​ऊर्जा को बेहतर बनाने के मुख्य सूत्र (Key Points)​ इनर स्माइल केयर ग्रुप के निदेशक ने अपनी ऊर्जा को सुरक्षित और सकारात्मक रखने के लिए निम्नलिखित उपाय बताए हैं :​

ब्रह्म मुहूर्त की ऊर्जा का लाभ: सुबह उठते ही कम से कम 1 घंटे तक मोबाइल को न छुएं। इस समय अपनी ऊर्जा को प्रकृति के साथ जोड़ें।​

मौन और ऊर्जा ध्यान: दिनभर में 15 मिनट का मौन मानसिक ऊर्जा को रिचार्ज करता है।

​नंगे पैर चलना: घास पर नंगे पैर चलने से शरीर की अतिरिक्त इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा जमीन में चली जाती है (Earthing), जो मोबाइल के रेडिएशन के असर को कम करती है।​

गैजेट फ्री ज़ोन: घर में भोजन की मेज और शयनकक्ष को पूरी तरह से गैजेट फ्री रखें।​

गहरी सांस का अभ्यास: जब भी तनाव महसूस हो, 5 बार गहरी सांस लें। यह आपके तात्कालिक ऊर्जा स्तर को सुधारता है।​

विशेष कुमार का संदेश:”हम तकनीक के गुलाम न बनें, बल्कि उसे अपनी प्रगति का साधन बनाएं। आपकी वास्तविक ऊर्जा आपके भीतर है, मोबाइल की स्क्रीन में नहीं। अपनी ऊर्जा को पहचानें और ‘इनर स्माइल’ के साथ जीवन जिएं।”

विशेष कुमार

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