आदि शक्ति मां दुर्गा की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 19 मार्च से प्रारंभ होने जा रहा है। यह समय केवल व्रत और पूजन का ही नहीं, बल्कि अपनी आत्मिक शक्ति को जागृत करने और प्रकृति के साथ जुड़ने का भी है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त (19 मार्च 2026) :शुद्ध और सात्विक वातावरण में घटस्थापना के लिए इन समयों का लाभ उठाएं:
प्रातः कालः सुबह 06:52 से 07:43 तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:53 तक
मां के चरणों में समर्पित होकर अपनी नकारात्मकता का त्याग करें और नव-ऊर्जा के साथ नव-संवत्सर का स्वागत करें।
दुर्लभ_संयोगः पंचक और खरमास के बीच शक्ति की आराधना : इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत खरमास और पंचक के साये में हो रही है। ज्योतिषीय दृष्टि से भले ही इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित हों, लेकिन देवी की साधना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए यह समय अत्यंत शुभ और सिद्ध फलदायी है। मां की भक्ति के लिए कोई बाधा नहीं होती, बस शुद्ध भाव की आवश्यकता है।
देवी_का_आगमनः पालकी की सवारी और उसका अर्थ : इस बार मां दुर्गा ‘पालकी’ (डोली) पर सवार होकर आ रही हैं। शास्त्रों के अनुसार, जब मां पालकी पर आती हैं, तो यह हमें धैर्य और संयम का संदेश देती हैं। ज्योतिषीय विश्लेषण संकेत देते हैं कि आने वाला समय आर्थिक और स्वास्थ्य के प्रति अधिक सतर्क रहने का है। अपनी जीवनशैली को अनुशासित रखकर हम मां के इस संकेत को सकारात्मकता में बदल सकते हैं।
गजासीन_प्रस्थानः सुख-समृद्धि का प्रतीक : नवरात्रि के समापन पर मां का प्रस्थान हाथी (गज) पर होगा। गजवाहन को शुभ वृष्टि, उत्तम कृषि और वैभव का प्रतीक माना गया है। यह संकेत है कि कठिन परिश्रम के बाद मां के आशीर्वाद से अंततः सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होगी।









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