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बैंक सखियों ने मानदेय बढ़ाने और सीधे खाते में भुगतान की उठाई मांग

बैंक सखियों ने मानदेय बढ़ाने

bareillylive@bareillynews:चार-पांच वर्षों से बैंकिंग सेवाएं दे रहीं बैंक सखियां बोलीं—चार हजार रुपये मानदेय में नहीं चल रहा गुजारा, 20 हजार रुपये करने की मांग

बरेली। विभिन्न बैंक शाखाओं में पिछले चार-पांच वर्षों से सेवाएं दे रहीं बैंक सखियों ने मानदेय बढ़ाने, समय पर भुगतान कराने और मानदेय की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजने की मांग उठाई है। बैंक सखियों का कहना है कि वह नियमित बैंकिंग सेवाओं के साथ गांवों में लोगों को बैंकिंग योजनाओं और वित्तीय सेवाओं के प्रति जागरूक करने का काम भी कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है।

बैंक सखियों मुस्कान, रेनु कांत और अनीता ने बताया कि वे सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक बैंक शाखाओं में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा प्रत्येक शुक्रवार और शनिवार को क्षेत्र में भ्रमण कर ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाओं के प्रति जागरूक करती हैं। ग्राम समूहों से जुड़े कार्य भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल हैं।

चार हजार रुपये मानदेय, वह भी समय से नहीं

बैंक सखियों के मुताबिक वर्तमान में उन्हें महज चार हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। उनका कहना है कि पिछले करीब एक वर्ष से मानदेय का भुगतान भी समय से नहीं हो रहा है। कई बार भुगतान में कई-कई महीने लग जाते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बैंक सखियों ने बताया कि मानदेय प्राप्त करने के लिए पहले सीएलएफ अध्यक्ष और सचिव से रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कराने पड़ते हैं। इसके बाद ब्लॉक और जिला स्तर पर विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है और भुगतान लंबित हो जाता है।

सीधे खातों में भुगतान की मांग

बैंक सखियों ने मांग की है कि मानदेय की राशि किसी मध्यवर्ती प्रक्रिया के बजाय सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाए, ताकि भुगतान में होने वाली देरी को खत्म किया जा सके। उन्होंने यह भी मांग की कि उन्हें स्थायी पद दिया जाए और उनके कार्य एवं जिम्मेदारियों को देखते हुए मानदेय में पर्याप्त वृद्धि की जाए।

बैंक सखियों ने मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने तथा नए बैंक खाते खुलवाने पर मिलने वाले इंसेंटिव का भुगतान भी सुनिश्चित कराने की मांग की है।

ये बैंक सखियां रहीं मौजूद

मांग करने वालों में सुनीता कुमारी, रामबती, दुर्गेश, मुस्कान, क्रांति, अनीता, नीतू, नीरज, मधु, रेनुकांत, केसरबती और कमलेश आदि शामिल रहीं।

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