bareillylive@bareillynews:सरकार का जवाब- बैंक नहीं मांग सकते मनमाने ढंग से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट, जबरन बीमा बेचने पर होगी कार्रवाई
बरेली। लोकसभा में बरेली के सांसद नीरज मौर्य ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण मिलने में आ रही समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने वित्त मंत्रालय से छोटे किसानों को मिलने वाले 4 प्रतिशत प्रभावी ब्याज दर वाले केसीसी ऋण, सिविल स्कोर और नो-ड्यूज सर्टिफिकेट जैसी शर्तों, ऋण नवीनीकरण में देरी, किसान ऋण पोर्टल की तकनीकी परेशानियों और फसल ऋण के साथ जबरन बीमा पॉलिसी थोपे जाने से जुड़े सवाल किए।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में दिए लिखित जवाब में बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 28 जनवरी 2015 के सर्कुलर के अनुसार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के ऋण के लिए किसानों से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट मांगने के लिए बाध्य नहीं हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड सहित किसी भी ऋण के लिए न्यूनतम सिविल स्कोर को अनिवार्य नहीं किया है। ऋण स्वीकृति का निर्णय संबंधित बैंक अपनी नीतियों और नियामकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार लेते हैं।
केसीसी ऋण के नवीनीकरण में देरी के सवाल पर सरकार ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा की समीक्षा बैंक की नीति और किसान के पुनर्भुगतान रिकॉर्ड के आधार पर की जाती है। उत्तर प्रदेश की राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति ने बैंकों को समय पर केसीसी ऋण के नवीनीकरण के निर्देश दिए हैं।
किसान ऋण पोर्टल की तकनीकी समस्याओं पर सरकार ने बताया कि सितंबर 2023 में शुरू किए गए इस पोर्टल से आधार आधारित सत्यापन, ब्याज अनुदान और प्रॉम्प्ट रिपेमेंट इंसेंटिव के दावों के निपटान में पारदर्शिता और तेजी आई है।
फसल ऋण के साथ जबरन बीमा या अन्य वित्तीय उत्पाद बेचने के मामलों पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार आरबीआई के संशोधित निर्देशों के तहत बैंकों द्वारा किसी भी वित्तीय उत्पाद या सेवा की अनिवार्य बंडलिंग पर रोक लगाई गई है। यदि ग्राहक की शिकायत पर गलत तरीके से बीमा या अन्य उत्पाद बेचना साबित होता है तो बैंक को पूरी राशि वापस करनी होगी और ग्राहक को हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी।
सांसद नीरज मौर्य ने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार और छोटे किसानों को आसानी से ऋण उपलब्ध कराने का मुद्दा लोकसभा में रखा था। सरकार के जवाब के बाद किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब स्पष्ट हो गया है कि बैंक मनमाने तरीके से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट नहीं मांग सकते और फसल ऋण के साथ जबरन बीमा पॉलिसी भी नहीं थोप सकते।






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