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मानव सेवा क्लब ने किया किशोर कुमार श्रद्धांजलि संगीत समारोह, सदाबहार गीतों से गुंजित हुआ सभागार

Bareillylive : मानव सेवा क्लब ने सदा बहार गायक किशोर कुमार की याद में रामपुर बाग स्थित सभागार में एक संध्या-संगीत महफ़िल आयोजित की, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने उनके लोकप्रिय गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत मां शारदे की वंदना से अरुणा सिन्हा ने की, जिससे वातावरण आध्यात्मिक और गरिमामय बन गया।

किशोर कुमार स्मृति संगीत सम्मान इस अवसर पर लोकप्रिय गायक अजय कुमार को प्रदान किया गया। सम्मान पट्ट और प्रशस्ति पत्र क्लब के अध्यक्ष सुरेन्द्र बीनू सिन्हा तथा महासचिव मुकेश सक्सेना ने अजय कुमार को सौंपा। अजय कुमार ने समारोह में किशोर कुमार के हिट गीत “ज़िन्दगी के सफर में” की भावपूर्ण प्रस्तुत‍ि दी, जिसे श्रोताओं ने विशेष सराहना दी और समा बांध दिया।

कार्यक्रम में कई गायकों ने अलग-अलग रचनाओं के माध्यम से किशोर कुमार की विविध अंदाज और शैली को जीवंत किया। सुरेन्द्र बीनू सिन्हा ने “तेरी भीगी-भीगी सी” गाकर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। प्रकाश चंद्र सक्सेना ने “कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना” प्रस्तुत किया, जबकि अरुणा सिन्ना ने “मेरे दिल में आज क्या है” गीत से अपनी मधुर आवाज़ का जादू बिखेरा। जितेंद्र सक्सेना ने “तेरा जैसा यार कहाँ” गाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

सत्येंद्र सक्सेना की प्रस्तुति “चला जाता हूँ किसी की धुन में” ने कार्यक्रम का मूड आनंदमय कर दिया। महासचिव मुकेश सक्सेना ने “पल भर के लिये कोई मुझे प्यार कर ले” गाकर अपनी प्रस्तुति दी। गायिका बेबी शर्मा ने “कोरा कागज़ था यह मन मेरा” पेश किया और शकुन सक्सेना ने “रिमझिम गिरे सावन” के ज़रिये बरसाती एहसासों को जीता-जागता कर दिया। प्रसिद्ध गायक डॉ. असित रंजन ने भी “आपकी आँखों में कुछ महके हुए से राज हैं” की शानदार प्रस्तुति से तालियों की गड़गड़ाहट बटोरी। अनिल गुप्ता ने “यह शाम मस्तानी” गाकर दर्शकों का मन मोह लिया।

समापन पर महासचिव मुकेश कुमार ने सभी कलाकारों और आयोजन में सहयोग करने वालों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में असित रंजन, गंगा राम पाल, ब्रजेश कुमार और सोनी विशेष रूप से शामिल रहे। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन सुरेन्द्र बीनू सिन्हा ने कुशलता से किया, जिसके कारण आयोजन सुचारु और प्रभावशाली रहा। इस भव्य संध्या-संगीत ने किशोर कुमार की यादें ताज़ा कर दीं और श्रोताओं को पुरानी यादों में खोने का अवसर दिया।

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