Bareillylive : एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार, 06 सितंबर 2026 को शाम 5.15 बजे जन्माष्टमी के पावन अवसर पर ‘कथा कान्हा की’ शीर्षक से एक भव्य कथक प्रस्तुति का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कथक गुरुओं और उनके विद्यार्थियों ने नृत्य के माध्यम से श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, प्रेम, भक्ति और प्रेरक प्रसंगों को जीवंत किया।
कथक नृत्य से कृष्ण लीला का मंचन:
कार्यक्रम की शुरुआत कथक के विद्यार्थियों कविमना, अन्वी, आयत, मीरा, विविक्षा, नित्या, त्रिशिका, मुक्तिका, पंखुड़ी, अनिका, प्रेमिका, वार्निका, नित्या ढींगरा, नित्या जैन, प्रकृति, जोया, खुशी, गौरा, वैदेही, गुरनूर, अनायास, गौरिका, अनुभूति, रित्विका, नितारा, मधुर, समृद्धि, नायरा, नूपुर, नियति और प्रियभाषिनी ने सामूहिक प्रस्तुति से की। बच्चों ने माखन चोरी और कालिया दमन लीला को कथक की मुद्राओं, ताल और भाव-अभिनय के साथ मंचित किया, जिससे दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
कथक गुरु अंशु कुमार शर्मा और उनके शिष्यों ने गिरि गोवर्धन लीला का मार्मिक प्रदर्शन किया, जबकि कथक गुरु देव ज्योति नमस्कार और लिया श्री चटर्जी के निर्देशन में विद्यार्थियों ने रासलीला का अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण मंचन किया। प्रस्तुतियों में कृष्ण के बाल स्वरूप, उनकी दिव्य शक्ति और राधा-कृष्ण के प्रेम-भक्ति के भावों को कथक की शैली में खूबसूरती से उकेरा गया।
संगीत से जुड़ी भक्ति की धुन:
कार्यक्रम में गायक गुरु प्रियंका ग्वाल और सात्विक मिश्रा ने अपने स्वरों से भक्तिमय वातावरण बनाया। इंस्ट्रुमेंटल सेक्शन में दीप कांत जौहरी एवं अमर कांत (तबला), पवन भारद्वाज एवं डेरिक अमन जेम्स (कीबोर्ड), ऋषभ पाठक (पखावज), सीमा (सितार) और अनुग्रह सिंह (ड्रम) ने अपनी कला से कार्यक्रम को और भी समृद्ध बनाया। संगीत और नृत्य के इस संगम ने जन्माष्टमी के उत्सव को एक आध्यात्मिक आयाम प्रदान किया।
उपस्थिति और संचालन:
इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति जी, आदित्य मूर्ति जी, आशा मूर्ति जी, ऋचा मूर्ति जी, देविशा मूर्ति जी, उषा गुप्ता, डा. एमएस बुटोला, डा. प्रभाकर गुप्ता, डा. अनुज कुमार, डा. शैलेश सक्सेना और डा. रीता शर्मा मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन दीपाली सक्सेना ने कुशलतापूर्वक किया।
सांस्कृतिक विरासत का संदेश:
एसआरएमएस रिद्धिमा द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल जन्माष्टमी का उत्सव था, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत के माध्यम से युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का एक सफल प्रयास भी था। कथक की पारंपरिक शैली में कृष्ण लीला का मंचन दर्शकों के लिए भक्ति और कला का अनूठा संगम साबित हुआ।






Leave a Reply