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ई-कॉमर्स पर सख्ती: 1 जनवरी से ऑनलाइन शॉपिंग में नहीं चलेगा कीमत और सर्च का खेल

ई कॉमर्स पर सख्त जनवरी से ऑनलाइन

bareillylive@bareillynews:नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों की ओर से कीमतों, सर्च रिजल्ट और उत्पादों की प्रस्तुति में अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं। उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियम, 2026 आगामी 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, नए नियमों का उद्देश्य ई-कॉमर्स क्षेत्र में कीमतों की पारदर्शिता बढ़ाना, उपभोक्ताओं को भ्रामक जानकारी से बचाना और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को अधिक जवाबदेह बनाना है।

डिस्काउंट दिखाने पर बतानी होगी पुरानी कीमत

नए नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को किसी उत्पाद पर छूट की घोषणा करते समय उसकी मौजूदा कम कीमत के साथ पूर्व कीमत भी बतानी होगी।

पूर्व कीमत से आशय उस कीमत से होगा, जिस पर छूट की घोषणा से पहले के 30 दिनों में उत्पाद सबसे कम कीमत पर उपलब्ध था। इससे कंपनियों द्वारा कृत्रिम रूप से कीमत बढ़ाकर बाद में बड़ी छूट दिखाने जैसी प्रथाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

सर्च रिजल्ट में हेरफेर पर रोक

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ऐसे तरीके नहीं अपना सकेंगे, जिनसे उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले सर्च रिजल्ट सामने आएं या किसी खोज से संबंधित उत्पाद की प्रासंगिकता प्रभावित हो।

इसके अलावा, अगर किसी उत्पाद को पैसे लेकर दूसरे उत्पादों की तुलना में प्रमुखता से दिखाया जाता है, तो उसकी स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग की पहचान स्पष्ट और प्रमुख रूप से करनी होगी।

डार्क पैटर्न पर भी होगी कार्रवाई

ई-कॉमर्स कंपनियों को उपभोक्ताओं को प्रभावित या गुमराह करने वाले डार्क पैटर्न से संबंधित 2023 में जारी दिशानिर्देशों का पालन करना होगा।

कंपनियों को हर साल अपने स्तर पर नियमों के अनुपालन का मूल्यांकन करना होगा और अनुपालन प्रमाणपत्र (Compliance Certificate) भी प्रदर्शित करना होगा।

शिकायत की कॉपी देना भी अनिवार्य

संशोधित नियमों के तहत शिकायतकर्ता को उसके द्वारा शिकायत अधिकारी के पास दर्ज कराई गई शिकायत की एक प्रति उपलब्ध करानी होगी। इससे शिकायत प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ता अपनी शिकायत का रिकॉर्ड रख सकेगा।

उत्पाद से जुड़ी अहम जानकारी देनी होगी

मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स कंपनियों को उपभोक्ताओं को खरीदारी से पहले महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें मुख्य रूप से ये जानकारी शामिल होगी:

  • Best Before या Use Before तारीख
  • रिटर्न की शर्तें
  • रिफंड की जानकारी
  • वारंटी की जानकारी
  • डिलीवरी से संबंधित जानकारी
  • भुगतान से जुड़ी महत्वपूर्ण शर्तें

आयातित सामान पर बताना होगा मूल देश

आयातित उत्पादों के मामले में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को आयातक का विवरण और उत्पाद के मूल देश (Country of Origin) की जानकारी भी देनी होगी। इससे उपभोक्ताओं को उत्पाद खरीदने से पहले उसके स्रोत की जानकारी मिल सकेगी।

बिना सहमति उपभोक्ता डेटा का इस्तेमाल नहीं

नए नियमों के तहत मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स कंपनियां उपभोक्ताओं के विवरण का निर्धारित उद्देश्यों के लिए स्पष्ट और सकारात्मक सहमति के बिना इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी।

अलग सेवाओं के नाम पर एक साथ नहीं वसूला जा सकेगा शुल्क

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म आपूर्ति से अलग सेवाओं के लिए उपभोक्ताओं पर एक साथ शुल्क नहीं लगा सकेंगे। हालांकि लॉयल्टी या सदस्यता कार्यक्रम इस प्रावधान के अपवाद होंगे।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से जुड़ना अनिवार्य

संशोधित नियमों के तहत प्रत्येक ई-कॉमर्स कंपनी को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) की कन्वर्जेंस प्रक्रिया में भागीदार बनना होगा।

उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक, वर्ष 2025 में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन को कुल 17,71,622 शिकायतें मिलीं। इनमें से 5,11,196 शिकायतें यानी करीब 29 प्रतिशत ई-कॉमर्स क्षेत्र से संबंधित थीं।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये बदलाव?

ई-कॉमर्स में तेजी से बढ़ती खरीदारी के बीच उपभोक्ताओं को वास्तविक कीमत, छूट, सर्च रिजल्ट, रिटर्न और अन्य शर्तों की सही जानकारी मिलना जरूरी है। सरकार का कहना है कि संशोधित नियमों का उद्देश्य कारोबार सुगमता के साथ एक पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता-केंद्रित ई-कॉमर्स व्यवस्था तैयार करना है।

ये संशोधन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत बनाए गए उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 को और मजबूत करते हैं।

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