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देहदान महादान, करने वाले अमर रहेंगे: देव मूर्ति

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एसआरएमएस में ‘देह से दिव्यता तक’ कार्यक्रम, देहदान का संकल्प लेने वाले 11 महादानियों का अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न, डोनर कार्ड और प्रमाणपत्र देकर सम्मान


क्लिनिकल एम्ब्रियोलॉजी पर राष्ट्रीय सीएमई में विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव, ‘टेक्स्ट बुक से टेस्ट ट्यूब तक’ विषय पर हुआ मंथन

बरेली। श्री राममूर्ति स्मारक (एसआरएमएस) मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग द्वारा शनिवार को “Clinical Embryology: Text Book to Test Tube” विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम तथा

“देह से दिव्यता तक” सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देहदान का संकल्प लेने वाले 11 महादानियों को सम्मानित किया गया। एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति ने सभी महादानियों को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न, पौधा, डोनर कार्ड और प्रमाणपत्र भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर देव मूर्ति ने कहा कि देहदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। उन्होंने कहा कि देहदान करने वाले लोग समाज और चिकित्सा विज्ञान के लिए अमूल्य योगदान देते हैं तथा ऐसे महादानी सदैव लोगों की स्मृतियों में अमर रहते हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 95 से अधिक देहदाता एसआरएमएस को अपना पार्थिव शरीर समर्पित कर चुके हैं, जबकि 100 से अधिक लोगों ने देहदान का संकल्प लिया है। उन्होंने समाज से अधिक से अधिक लोगों से इस पुनीत कार्य के लिए आगे आने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित राष्ट्रीय सीएमई में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने क्लिनिकल एम्ब्रियोलॉजी और जन्मजात विकृतियों के आधुनिक उपचार पर अपने विचार रखे।

एनाटॉमिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के एडिटर-इन-चीफ एवं केएमसी मंगलूर के विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. विश्राम सिंह ने जन्मजात विकृतियों की बढ़ती चुनौतियों और भ्रूण विज्ञान की भूमिका पर व्याख्यान दिया।

एसजीपीजीआई, लखनऊ के मेडिकल जेनेटिक्स विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. कौशिक मंडल ने जन्मजात विकृतियों की रोकथाम और प्रबंधन में समय पर मूल्यांकन के महत्व पर प्रकाश डाला।

इसके अलावा डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने प्रसव-पूर्व निदान एवं क्लिनिकल एम्ब्रियोलॉजी, जबकि डॉ. अंजु लता वर्मा ने आईवीएफ प्रयोगशालाओं में भ्रूण विज्ञान की उपयोगिता पर विस्तृत जानकारी दी। डॉ. यतींद्र सिंह वर्मा ने गैमीट से जन्म तक की संपूर्ण प्रक्रिया का वर्कशॉप प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। सीएमई के वैज्ञानिक सत्र में पोस्टर एवं ओरल प्रेजेंटेशन भी आयोजित किए गए।

एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. नमिता मेहरोत्रा ने सभी देहदान संकल्पकर्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि उनका यह निस्वार्थ निर्णय आने वाली पीढ़ियों के चिकित्सकों को बेहतर प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डॉ. एम.एस. बुटोला ने संस्थान की उपलब्धियों की जानकारी साझा की। कार्यक्रम के अंत में डॉ. धनंजय कुमार ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन आदित्य मूर्ति, ट्रस्ट सलाहकार सुभाष मेहरा, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आर.पी. सिंह, वाइस प्रिंसिपल डॉ. रोहित शर्मा, डीन पीजी डॉ. एस.के. सागर, डीन यूजी डॉ. बिंदु गर्ग, डीएसडब्ल्यू डॉ. क्रांति कुमार सहित सभी विभागाध्यक्ष, चिकित्सक, एमबीबीएस, पैरामेडिकल एवं नर्सिंग के विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एमबीबीएस छात्राओं गौरी शर्मा एवं श्वेता पांडेय ने किया।Those who perform the supreme act of organ donation will remain immortal: Dev Murti

एक ही परिवार की पांच बहनों ने लिया देहदान का संकल्प

‘देह से दिव्यता तक’ कार्यक्रम में सम्मानित 11 महादानियों में इज्जतनगर के बसंत विहार की पांच सगी बहनें भी शामिल रहीं। अंजना शर्मा (48), कंचना शर्मा (46), रंजना शर्मा (43), कल्पना शर्मा (40) और अल्पना शर्मा (38) ने एक साथ देहदान का संकल्प लेकर समाज के सामने प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।

इसके अलावा निर्मल भसीन (81), आनंद प्रकाश गुप्ता (75) एवं उनकी पत्नी सुधा रानी (70), अवनेश चंद्र सक्सेना (74), रेलवे के सेवानिवृत्त टेक्नीशियन सुभाष चंद्र शर्मा (72), पूनम चड्ढा (58) तथा नीलिमा पाठक (55) को भी देहदान के संकल्प के लिए सम्मानित किया गया।

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