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ब्रॉड पीक हिमस्खलन: निर्मल पुर्जा समेत 10 पर्वतारोहियों की मौत

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@Bareillylive: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में स्थित दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण चोटियों में शामिल ब्रॉड पीक पर आए भीषण हिमस्खलन में दिग्गज नेपाली-ब्रिटिश पर्वतारोही निर्मल ‘निम्सदाई’ पुर्जा समेत 10 पर्वतारोहियों की मौत हो गई। इस दुखद घटना ने वैश्विक पर्वतारोहण समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है।

7,000 मीटर की ऊंचाई पर हुआ भीषण हिमस्खलन

निर्मल पुर्जा की अभियान कंपनी एलीट एक्सपेड ने शनिवार को उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि की। कंपनी के अनुसार, हिमस्खलन की चपेट में आए अभियान दल का कोई भी सदस्य जीवित नहीं बच सका। हादसा बृहस्पतिवार सुबह करीब 9 बजे लगभग 7,000 मीटर की ऊंचाई पर हुआ, जब 10 सदस्यीय दल ब्रॉड पीक की चोटी की ओर बढ़ रहा था।

मृतकों में निर्मल पुर्जा के अलावा नेपाल के पांच पर्वतारोही तथा पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका और चीन के एक-एक पर्वतारोही शामिल हैं।

खराब मौसम के बीच जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन

पाकिस्तान अल्पाइन क्लब के अनुसार, अब तक चार शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि अन्य पर्वतारोहियों की तलाश जारी है। खराब मौसम और दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद स्थानीय बचाव दल और पाकिस्तान सेना के हेलीकॉप्टर खोज अभियान में जुटे हुए हैं।

पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि अभियान पूरा होने तक हरसंभव सहायता जारी रहेगी। वहीं, नेपाल सरकार ने भी इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

निर्मल पुर्जा की उपलब्धियां रहेंगी हमेशा याद

निर्मल पुर्जा आधुनिक पर्वतारोहण के सबसे प्रतिष्ठित नामों में गिने जाते थे। उन्होंने वर्ष 2019 में दुनिया की 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली सभी 14 चोटियों को केवल 6 महीने और 6 दिन में फतह कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

उन्होंने अपने 16 वर्षीय सैन्य करियर में छह वर्ष गोरखा रेजिमेंट और 10 वर्ष ब्रिटेन की स्पेशल फोर्सेज में सेवा दी। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें मेंबर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (MBE) से सम्मानित किया गया था।

ब्रॉड पीक अभियान बना अंतिम मिशन

ब्रॉड पीक, काराकोरम पर्वत श्रृंखला में के2 के निकट स्थित दुनिया का 12वां सबसे ऊंचा पर्वत है और इसे सबसे कठिन पर्वतारोहण अभियानों में गिना जाता है। यह अभियान निर्मल पुर्जा के उस मिशन का अंतिम चरण था, जिसमें वह दुनिया की सभी 8,000 मीटर से ऊंची 14 चोटियों पर दूसरी बार सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी करने वाले थे।

उनके निधन से पर्वतारोहण जगत ने एक ऐसे साहसी और प्रेरणादायक व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेंगी।


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