धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल
breillylive@bareillynews:नयी दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्न पत्र लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शनिवार को जंतर-मंतर स्थित विरोध प्रदर्शन स्थल पर जश्न का माहौल देखने को मिला।
हजारों की संख्या नें जुटे प्रदर्शनकारी ढोल की धुन पर नाचते-गाते, तिरंगा लहराते और ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष करते दिखे। प्रदर्शनकारियों ने इसे उनके कई सप्ताह से जारी आंदोलन की पहली बड़ी जीत करार दिया।
केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक खत्म होने के तुरंत बाद भी जश्न जारी रहा। इस दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रवक्ताओं ने कहा कि सरकार द्वारा संगठन की सभी मांगें स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन वापस लिया जा रहा है।
कुछ दिन पहले तक जिस प्रदर्शन स्थल पर झड़पें हुई थीं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे और लोग घायल हुए थे, वहीं अब जश्न का माहौल है। प्रदर्शनकारी एक-दूसरे को गले लगा रहे थे, तिरंगा लहरा रहे थे, ‘चक दे, इंडिया’ गीत पर गोल घेरा बनाकर नाच रहे थे और लोकतंत्र व छात्र एकता के समर्थन में नारे लगाते हुए डफली बजा रहे थे।
कई प्रदर्शनकारी डॉ. बी. आर. आंबेडकर की तस्वीर हाथों में लिए हुए थे, जबकि कुछ लोग एक लोकप्रिय सोशल मीडिया मीम की तर्ज पर वीडियो बना रहे थे। इसमें वे पहले मोबाइल फोन की स्क्रीन पर प्रदर्शित धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का पत्र दिखाते और फिर जंतर-मंतर पर जुटी जश्न मना रही भीड़ की ओर इशारा करते।
मंच पर मौजूद सदस्यों और स्वयंसेवकों से लेकर भीड़ के सबसे पीछे खड़े लोगों तक सभी प्रदर्शनकारी स्वतः एक साथ राष्ट्रगान गाने लगे। इसके बाद उन्होंने फिर जोरदार नारे लगाए। प्रदर्शन स्थल से घर लौट रहे एक प्रदर्शनकारी नितिन ने कहा कि यह इस्तीफा बहुत पहले हो जाना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक को 11 किलोग्राम वजन नहीं गंवाना पड़ता और लोगों को इतना खून भी नहीं बहाना पड़ता। झड़पों, बर्बरता और हिंसा से बचा जा सकता था।
हमें खुशी है कि आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। कई प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह इस्तीफा उनके अभियान की सिर्फ शुरुआत है।
एक अन्य प्रदर्शनकारी नम्रता ने कहा, कि यह तो सिर्फ पहला कदम है। हमारी लड़ाई व्यवस्था से है। शिक्षा मंत्री से लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी तक, सभी को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। कई लोगों के लिए यह जश्न बेहद निजी मायने भी रखता था। कार्तिक (24 ) ने कहा, मैं आंदोलन की शुरुआत से ही यहां हूं।
20 जुलाई को आंसू गैस के गोले लगने से मैं घायल हो गया था और मेरे एक दोस्त को अवरोधक से धक्का देकर भिड़ा दिया गया था। उस दिन की बर्बरता देखना बहुत पीड़ादायक था। आज मुझे लगता है कि जब लोग एकजुट होते हैं, तो बदलाव ला सकते हैं। मेरा भरोसा फिर से कायम हो गया है।
सिर पर बंधी पट्टी की ओर इशारा करते हुए एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, “अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तो यह सब बेकार चला जाता। इससे एकता की ताकत का पता चलता है। हम सब इस लड़ाई में साथ हैं और यह सब करना सार्थक रहा। जय हिंद, जय भारत।”
प्रदर्शन में शामिल 23 वर्षीय सायना ने कहा कि इस नतीजे ने उनकी पीढ़ी के बारे में बनी धारणाओं को चुनौती दी है। सायना ने 20 जुलाई के प्रदर्शन में अपने भाई-बहन के साथ हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा, “हमारे माता-पिता अक्सर कहते हैं कि हमारी पीढ़ी हमेशा मोबाइल फोन में लगी रहती है, गंभीर नहीं है और सब कुछ तैयार मिलता है।
आज मैं उनसे कहना चाहती हूं कि भले ही हम फोन पर रहते हों, लेकिन हमने मोदी सरकार के एक मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। हम एकजुट हुए, इतने बड़े स्तर पर प्रदर्शन आयोजित किए और यह बदलाव लेकर आए।” जहां कई प्रदर्शनकारी अपने घरों के लिए रवाना होने लगे, वहीं अन्य लोग जश्न में शामिल होने के लिए लगातार जंतर-मंतर पहुंचते रहे।
पाबंदियां हटने और मेट्रो स्टेशन के प्रवेश द्वार फिर से खुलने के बाद कई लोगों ने कहा कि अब प्रदर्शन स्थल तक आने-जाने की लंबी और कठिन यात्रा आसान हो जाएगी। कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह इस्तीफा लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन की ताकत का प्रमाण है। उन्होंने भीड़ से कहा, “वे कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते।
हम कहते हैं कि झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।” दीपके ने भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा, “अगर आपने हमें ‘कॉकरोच’ नहीं कहा होता, तो मैं भारत वापस नहीं आता। अगर आपने हमें ‘कॉकरोच’ नहीं कहा होता, तो देश के युवा सड़कों पर नहीं उतरते। अगर आपने हमें ‘कॉकरोच’ नहीं कहा होता, तो धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता।






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