कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान माहिष्मती नगरी का एक बहुत ही प्रतापी, अभिमानी और शक्तिशाली राजा था, जिसका मूल नाम कार्तवीर्यार्जुन था। उसे गुरु दत्तात्रेय से वरदान में एक हजार भुजाएँ (हाथ) मिली थीं, इसलिए उसे ‘सहस्रबाहु’ कहा जाता था।कार्तवीर्य अर्जुन (राजा कृतवीर्य का पुत्र)। चंद्रवंश की शाखा हैहय वंश के संस्थापक हुए ।
राजा कार्तविर्यार्जुन सुदर्शन चक्र के अवतार माने गए। आज भी मान्यता है कि इनकी साधना करने से हर प्रकार की गुम वस्तु मिल जाती है। सुदर्शन चक्र के बारे में शास्त्रों में वर्णित है कि वह किसी भी दिशा अथवा किसी भी लोक में जाकर वांछित सामग्री खोज लाने में सक्षम है। उनकी साधना के लिए दीपक लगाकर पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठें। अपनी गुम वस्तु की कामना को उच्चारण कर भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्रधारी रूप का ध्यान करें। चक्र को रक्त वर्ण में ध्याएं एवं इस मंत्र का विश्वासपूर्वक जप करें।
ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान!
यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते!!
यह एक प्राचीन मंत्र है जो भगवान कार्तवीर्य अर्जुन को समर्पित है, जो एक महान राजा और भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं इस मंत्र का भावार्थ है!
मैं भगवान कार्तवीर्य अर्जुन की स्तुति करता हूं, जो एक हजार भुजाओं वाले महान राजा हैं उनके स्मरण मात्र से खोया हुआ या चुराया हुआ सब कुछ वापस प्राप्त किया जा सकता है!
इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को निम्नलिखित लाभ होते हैं!
1.खोए हुए वस्त्र या धन की प्राप्ति
2.जीवन में सफलता और समृद्धि
3.नकारात्मक ऊर्जा का नाश
4.आध्यात्मिक और भौतिक लाभ
यह मंत्र भगवान कार्तवीर्य अर्जुन की शक्ति और महिमा को दर्शाता है,उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करता है!यह मंत्र मुख्य रूप से खोई हुई वस्तु या धन को पुनः प्राप्त करने के लिए जपा जाता है।










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