नेपाल फ्लैश फ्लड, नेपाल में बाढ़, 105 भारतीय लापता, रसुवा बाढ़, भोटेकोशी नदी बाढ़, नेपाल-तिब्बत सीमा बाढ़, कैलाश मानसरोवर यात्री लापता
bareillylive@bareillynews:काठमांडू, 26 अगस्त। नेपाल में तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में बुधवार सुबह आई अचानक भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज बहाव और मलबे ने रसुवा, धादिंग, नुवाकोट और चितवन जिलों में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ में कम से कम 17 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 105 भारतीय नागरिक और 37 अनिवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं।
तिब्बत सीमा के पास चट्टान खिसकने से आई बाढ़
अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई। शुरुआती उपग्रह विश्लेषण में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अस्थिर पहाड़ी चट्टानों के खिसकने को बाढ़ की संभावित वजह बताया गया है। नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि रसुवा में हुई बारिश इस अचानक आई बाढ़ का कारण नहीं थी।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर लेंडे नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि और नदी के अवरुद्ध होने से भोटेकोशी में पानी और मलबे का तेज बहाव आया, जो आगे त्रिशूली नदी तक पहुंचा।
दूसरी बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नदी के अवरुद्ध स्थल पर बनी झील का पानी अभी पूरी तरह खाली नहीं हुआ है। ऐसे में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में एक और बाढ़ का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने और अगली सूचना तक नदियों से दूर रहने की अपील की है।
रसुवा सबसे ज्यादा प्रभावित, पुल और सड़कें बहीं
तिब्बत सीमा के पास स्थित रसुवा जिला बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। रसुवागढ़ी इलाके में सीमा शुल्क परिसर में खड़े कई वाहन और सामान पानी के तेज बहाव में बह गए। एक नवनिर्मित पुल भी नष्ट हो गया।
बाढ़ ने नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली करीब 42 किलोमीटर लंबी सड़क को कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त कर दिया। कई कंक्रीट पुल और अस्थायी पुल भी बह गए।
स्याफ्रूबेसी, बेत्रावती, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं।
105 भारतीयों समेत 384 यात्री लापता
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, रसुवा में बाढ़ के बाद 384 यात्री लापता बताए गए हैं। इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक हैं। विदेशी नागरिकों में कम से कम 105 भारतीय शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं।
लापता भारतीयों में बड़ी संख्या उन यात्रियों की है जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत की ओर जा रहे थे। ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार, कम से कम 59 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्री थे।
सुरक्षा बलों के जवान भी लापता
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा में बताया कि विभिन्न स्थानों पर 80 से अधिक सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं। इनमें नेपाल सेना के 44 जवान शामिल बताए गए हैं। रसुवा में सशस्त्र पुलिस बल के चार जवानों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है।
जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान
अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र को भी बड़ा झटका दिया है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल के अनुसार, रसुवा और नुवाकोट में 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा निर्माणाधीन पांच परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।
प्रमुख प्रभावित परियोजनाओं में
111 मेगावाट की रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना
78 मेगावाट की संजेन खोला जलविद्युत परियोजना
60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3ए परियोजना
शामिल हैं।
नेपाल सेना ने शुरू किया बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन
बाढ़ के बाद नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है। नेपाल सेना ने खोज एवं बचाव अभियान के लिए हेलीकॉप्टर लगाए हैं। सेना के मुताबिक, रसुवा के स्याफ्रूबेसी से छह, मेलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया है।
त्रिशूली स्थित सैन्य प्रशिक्षण केंद्र में एक उपचार केंद्र भी स्थापित किया गया है, जहां सैन्य चिकित्सा कर्मी बाढ़ प्रभावित लोगों को आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। बचाव अभियान में ड्रोन और प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की भी मदद ली जा रही है।
भारत ने जारी किए आपातकालीन नंबर
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए भारतीय दूतावास ने आपातकालीन संपर्क नंबर जारी किए हैं। दूतावास ने कहा है कि वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और प्रभावित भारतीयों के बचाव एवं राहत के लिए समन्वय किया जा रहा है।
भारत सरकार ने भी नेपाल को मानवीय सहायता देने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल में राहत और बचाव प्रयासों के लिए सहायता का आश्वासन दिया है।
सीमा व्यापार और परिवहन व्यवस्था प्रभावित
रसुवागढ़ी नेपाल और चीन के बीच महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग है। बाढ़ से यहां सीमा शुल्क परिसर, सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। इससे नेपाल-तिब्बत सीमा के बीच व्यापारिक और परिवहन गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। बाढ़ की वजह से कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे राहत और बचाव दलों के लिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
लोगों को नदी किनारे नहीं जाने की चेतावनी
नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रशासन ने लोगों से नदियों के आसपास जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
बाढ़ की स्थिति तेजी से बदल रही है और नदी के ऊपरी हिस्से में पानी जमा होने की चेतावनी के कारण प्रशासन ने लोगों से आधिकारिक निर्देशों का पालन करने को कहा है।
पिछले साल भी भोटेकोशी में आई थी विनाशकारी बाढ़
भोटेकोशी नदी क्षेत्र में पिछले वर्ष भी दो बार विनाशकारी बाढ़ आई थी। इन घटनाओं में रसुवा जिले में भारी नुकसान हुआ था और कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी। मौजूदा आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को सामने ला दिया है।






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