री-मेडिकल में पास कराने के नाम पर 40 हजार रुपये लेने का डिजिटल साक्ष्य मिला, फर्जी मोहर और दस्तावेज बरामद
bareillylive@bareillynews:बरेली। अग्निवीर भर्ती के री-मेडिकल में फेल अभ्यर्थियों को पास कराने का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह का मिलिट्री इंटेलिजेंस और कैंट पुलिस ने खुलासा किया है। आरोपी खुद को सेना का सेवानिवृत्त हवलदार बताकर अभ्यर्थियों से 40 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की रकम मांगता था। पुलिस ने गिरोह के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि उसका साथी फरार है।
एसपी सिटी मानुष पारिक के अनुसार, 25 अगस्त को मिलिट्री इंटेलिजेंस को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति मिलिट्री अस्पताल के पास अग्निवीर जनरल ड्यूटी के री-मेडिकल में फेल अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर रुपये लेने की कोशिश कर रहा है। सूचना के आधार पर कैंट पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान लखनऊ के सैरपुर क्षेत्र निवासी राजेश तिवारी के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके कब्जे से फर्जी मोहर, फर्जी लेटर, मोबाइल फोन और अभ्यर्थियों की जानकारी वाला रजिस्टर बरामद किया है।
मोबाइल में मिला 40 हजार रुपये के लेनदेन का साक्ष्य
पुलिस के मुताबिक, आरोपी के मोबाइल की जांच में 21 अगस्त को अंकित सिंह चौहान नाम के अभ्यर्थी की यूपीआई आईडी से राजेश तिवारी के खाते में 40 हजार रुपये भेजे जाने का डिजिटल साक्ष्य मिला है। खास बात यह है कि अंकित का नाम आरोपी के पास मिले रजिस्टर में भी दर्ज था।
जांच में सामने आया कि आरोपी अभ्यर्थियों से री-मेडिकल में पास कराने के नाम पर 40 हजार से एक लाख रुपये तक की रकम मांगता था।
जबलपुर में अकादमी चलाने के दौरान हुई थी साथी से मुलाकात
पूछताछ में राजेश ने पुलिस को बताया कि वह पहले जबलपुर में सेना भर्ती की तैयारी कराने वाली अकादमी चलाता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात गजेंद्र सिंह से हुई। पुलिस के अनुसार, दोनों ने मिलकर अभ्यर्थियों को फर्जी दस्तावेज और कॉल लेटर दिखाकर भरोसे में लेना शुरू किया और री-मेडिकल में पास कराने का झांसा देने लगे।
पुलिस को आरोपी के मोबाइल से गजेंद्र सिंह के नाम से हुई वाट्सऐप चैट भी मिली है। इसमें अभ्यर्थियों के रेफरल फॉर्म और रुपये के लेनदेन से जुड़ी बातचीत सामने आई है।
अभ्यर्थियों की जानकारी वाट्सऐप पर भेजता था
पुलिस के अनुसार, राजेश अभ्यर्थियों की जानकारी वाट्सऐप के जरिए गजेंद्र सिंह को भेजता था। रकम मिलने के बाद उसका एक हिस्सा अपने पास रखकर बाकी रकम बताए गए खाते में भेज देता था। पुलिस अब चैट, रजिस्टर और डिजिटल लेनदेन के आधार पर गिरोह के नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
नए शिकार की तलाश में पहुंचा था अस्पताल के पास
पुलिस के मुताबिक, राजेश तिवारी 25 अगस्त को मिलिट्री अस्पताल के पास नए अभ्यर्थियों को अपने जाल में फंसाने की तलाश में पहुंचा था। इसी दौरान मिलिट्री इंटेलिजेंस की सूचना पर कैंट पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
फिलहाल पुलिस फरार आरोपी गजेंद्र सिंह की तलाश में जुटी है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने अब तक कितने अग्निवीर अभ्यर्थियों को अपना शिकार बनाया है और इसमें कितने लोग शामिल हैं।






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